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जो मेरी मर्जी से काम नहीं करेगा उसे हटा दूंगा: शिक्षा मंत्री

रायपुर. लगातार विवाद और बोर्ड परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग के कामकाज पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्री केदार कश्यप सबके निशाने पर हैं। दैनिक भास्कर ने मंत्री से सारे मुद्दों को लेकर सीधी बात की। उन पर सबसे बड़ा आरोप यही लग रहा है कि विभाग के अफसर उनकी सुनते नहीं। इस कारण व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ रही है।
मंत्री ने ऐसे अफसरों को बदलने का ऐलान कर दिया है। पर सरकारी स्कूल से टॉपर नहीं निकलने के सवाल पर उनका जवाब सरकारी ही है-हम सुधार कर रहे हैं। प्रस्तुत है केदार कश्यप से बातचीत-
सवाल- शिक्षा विभाग के अफसर आपकी नहीं सुन रहे हैं?
जवाब- ऐसा नहीं कह सकते।

सवाल-आपसे पूछते नहीं, सीधे फैसले कर लेते हैं?
जवाब-नहीं-नहीं। एक राय के बाद ही फैसले लिए जाते हैं।
सवाल-क्या विभाग में आपकी पकड़ नहीं है?
जवाब-मेरी मर्जी के बिना कोई फैसला नहीं होता। जो मेरी मर्जी से काम नहीं करेगा उसे बदल दूंगा।
सवाल- पर सुकमा के कलेक्टर ने शिक्षकों का ग्रीष्म कालीन अवकाश रद्द करने के पहले आपकी राय नहीं ली?
जवाब- शिक्षा विभाग का ही ऐसा पुराना आदेश है कि विशेष कक्षाएं लगाई जा सकती हैं। इसलिए पूछने की जरूरत नहीं थी। वहां रिजल्ट खराब आया है। इसलिए कलेक्टर ने ऐसा किया होगा।
सवाल-माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अापकी मर्जी के बिना पर्चे छापने में मनमानी नहीं की?
जवाब- कुछ नहीं बाेलूंगा।
सवाल-छत्तीसगढ़ में उड़िया पढ़ाने का फैसला अफसर का ही तो है?
जवाब- नहीं ऐसा नहीं है-मुस्कुराते हुए -कोई एक भाषा का चयन करना था, इसलिए कर दिया।
सवाल-सरकारी स्कूल से टॉपर तो आ ही नहीं पा रहे?
जवाब-हम गुणवत्ता सुधारने चरणबद्ध प्रोग्राम चलाया है।
सवाल-आप जवाबदेही तय नहीं कर रहे, इस कारण तो ऐसा नहीं हो रहा?
जवाब-नहीं, मैंने आज से ही तय कर लिया है कि बड़े अफसरों से बात करुंगा ही। प्राचार्यों से भी सीधी बात करुंगा।
सवाल-क्या केवल इतना काफी होगा?
जवाब- नहीं, मैं हर जिले में शिक्षा अिधकारी को जवाबदेह बनाऊंगा। परिणाम बेहतर नहीं आया तो डीईओ को हटा दू्ंगा। आने वाले सालों में हमें अच्छे परिणाम मिलेंगे।
सवाल-टीचर भी तो ट्रेनिंग नहीं ले पाते?
जवाब-विभाग तो देना चाहता है। पर कोई न कोई पॉलिटिकल कनेक्शन का उपयोग कर अपनी ट्रेनिंग रद्द करवा लेते हैं।
सवाल-बात तो वही हुई ना, विभाग अपना काम नहीं कर पा रहा।
जवाब-हम सारे फैसलों की समीक्षा कर उसके बेहतर क्रियान्वयन के लिए काम कर रहे हैं।
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