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टीईटी विवाद: शिक्षक दिल्ली पहुंचे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उठाई अपनी मांगें

 छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के शिक्षक टीईटी (Teacher Eligibility Test) विवाद को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे मिलकर अपने लंबित मुद्दों को सामने रखना है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता केवल नए नियुक्त शिक्षकों के लिए होनी चाहिए, जबकि अनुभवी और लंबे समय से सेवा में लगे शिक्षकों पर इसे लागू करना अनुचित और असंगत है।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपते हुए यह भी मांग की कि प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ, प्रशिक्षण, नौकरी सुरक्षा और वेतन विसंगतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया जाए। शिक्षक संघों का रुख इस मामले में स्पष्ट और सख्त रहा है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों पर विवाद को न्यायपूर्ण और शीघ्र हल करने का दबाव बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा नीति में बदलाव केवल खुली चर्चा, लाभार्थियों की राय और निष्पक्ष निर्णय के बाद ही लागू होना चाहिए। टीईटी विवाद अब केवल परीक्षा का मामला नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षक अधिकार, नौकरी सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता जैसे व्यापक विषयों से जुड़ गया है।

इस पूरी प्रक्रिया से यह भी स्पष्ट होता है कि शिक्षक संगठनों की संगठन क्षमता और संवाद कौशल पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। आने वाले समय में सरकार और शिक्षक संघों के बीच सहयोगपूर्ण समाधान शिक्षा प्रणाली सुधार और शिक्षक संतुष्टि के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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