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'मंत्री के करीबी को आईएएस अवार्ड, मोदी जी सीबीआई जांच करवाएं'

रायपुर, अनिल मिश्रा। छत्तीसगढ़ में गैर प्रशासनिक संवर्ग से आईएएस अवार्ड होने का आरोप लगाने वाले एक अफसर ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। यह भी लिखा है कि मंत्रालय में जमे रसूखदारों से ताल्लुक रखने वाले गैर प्रशासनिक सेवा के अफसर नाम सूची में जुड़वा लेते हैं जबकि फील्ड में सालों से काम करने वाले रह जाते हैं।
ऐसे में चयन प्रक्रिया निरस्त कर सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव व मुख्य सचिव को हटाकर जांच कराई जाए ताकि अलोकतांत्रिक व पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को रोका जा सके।
शिकायतकर्ता गिरीश कोल्हे कोष, लेखा एवं पेंशन विभाग में संयुक्त संचालक हैं। उनका आरोप है कि सरगुजा के किसी सरकारी कॉलेज में पदस्थ अनिल चौधरी राज्य के एक मंत्री का करीबी है। वह 15 साल से मूल काम छोड़कर मंत्रालय में बाबूगिरी कर रहा है। कोल्हे ने पत्र में लिखा है कि यूपीएससी को साक्षात्कार के लिए भेजे गए अन्य नाम भी विवादित हैं।
हर साल खास लोगों के नाम साक्षात्कार के लिए भेजे जाते हैं। पत्र में लिखा है कि उनके बैचमेट डॉ.अल्पना घोष व राजीव जायसवाल का नाम तीन साल से भेजा जा रहा है। जबकि उन्हें आवेदन का मौका नहीं दिया गया है। मंत्रालय में शिक्षक सहित बीएसएनएल के कर्मचारी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं।
क्या है एलाइड सेवाएं : छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) से चयनित ऐसे अफसर जो डिप्टी कलेक्टर या उसी तरह की दूसरी प्रशासनिक सेवाओं की बजाय गैर प्रशासनिक विभागों जैसे कृषि, उद्योग, नगरीय निकाय आदि के हैं, एलाइड कहे जाते हैं। इन सेवाओं में से तीन फीसदी को काम के आधार पर आईएएस अवार्ड होता है। संख्या के हिसाब से कोई एक ही हो पाता है।
आवेदन से रोका नहीं जाता : नियम कायदे सब सार्वजनिक हैं। किसी को आवेदन करने से रोका नहीं जाता है। अंतिम सूची केंद्र सरकार व यूपीएससी को भेजी जाती है। -निधि छिब्बर, सचिव, जीएडी
चयन प्रक्रिया में अफसरों को सीआर, दक्षता, विशिष्ट सेवाओं आदि को ध्यान में रखकर शामिल किया जाता है। सब कुछ प्रक्रिया के तहत होता है। गड़बड़ी का सवाल ही नहीं है। -एन बैजेंद्र कुमार, अपर मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़
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