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शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक तो अधिकारियों के लिए क्यों नहीं?

रायपुर। छग शासन  द्वारा प्रदेश के शासकीय  स्कूलों में माह जनवरी से बायोमेट्रिक हाजरी के नाम से भेदभाव किया जा रहा है, केवल शिक्षक संवर्ग को गुणवत्ता के नाम पर नए-नए फरमान जारी कर परेशान किया जा रहा है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण बायोमेट्रिक अटेंडेंस है।
शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस ना लिए जाने पर शिक्षाकर्मी नेता संजय शर्मा ने विभाग की मंशा  पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर शाला की मूलभूत भौतिक आवश्यकता को पूरा न कर शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान करने के उद्देश्य से नए-नए आदेश जारी कर मानसिक अघात पहुचाने में कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा हैं।  एक ओर जहां स्कूलों में पदस्थ समस्त शिक्षकों को प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दोनो समय बायोमेट्रिक अटेंडेंस से लगानी है। वहीं दूसरी ओर उन्ही हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में पदस्थ लिपिक, भृत्य एवं शिक्षा विभाग के अन्य कार्यालय के कर्मचारियों को इस सिस्टम  से अलग क्यों रखा गया है।

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