भास्कर न्यूज|कांकेर/दुर्गूकोंदल/पखांजूर
जिले के अधिकांश अंदरूनी व नक्सली प्रभावित विकासखंड के स्कूलों में
शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद यहां के शिक्षकों को जिला
मुख्यालय या सड़क किनारे के स्कूलों में अटैच कर दिया गया है। इससे अंदरूनी
इलाके के स्कूलों में पढ़ाई ठप है।
इसके अलावा शालाओं में कासमॉस
बायोमैट्रिक मशीन आने का सबसे बड़ा नुकसान अटैच शिक्षकों को हो रहा है। अटैच
शिक्षक बायोमेट्रिक्स के रूप में सामने आई मुसीबत से बचने तरह तरह के
जुगाड़ लगा रहे हैं। अटैच शिक्षकों पर एजुपोर्टल में छेड़खानी कर अपना मूल
स्थान व विभाग को बदलने का आरोप भी लग रहा है। इसका खुलासा करते नवीन
शिक्षाकर्मी संघ ने बीआरसी कोयलीबेड़ा को शिकायत भी सौंपी है।
दुर्गूकोंदल में शिक्षाकर्मी वर्ग दो के 38 पद रिक्त होने से कई
माध्यमिक शालाओं में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। दुर्गूकोंदल के अधिकांश
शिक्षाकर्मी अपनी पहुंच का फायदा उठा चारामा में अटैच हो गए हैं। पिछले दो
साल में यहां सबसे ज्यादा अटैचमेंट का खेल चला है। दुर्गूकोंदल कराकी से
खेमन सिन्हा 2016 से हाईस्कूल भोथा चारामा, दियागांव से ममता साहू को 2016
में लखनपुरी, पचांगी से द्वारिकाप्रसाद यादव को 2016 में तिरकादंड चारामा,
मिंदोड़ा से निर्मला ध्रुव को उकारी चारामा अटैच किया गया। इन्हे चारामा
विकासखंड के स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने का कारण बताकर
जिला पंचायत कांकेर से आदेशित किया गया है। सभी अटैच शिक्षाकर्मियों को
दुर्गूकोंदल विकासखंड से वेतन दिया जा रहा है। 2016 में अटैच किए जाने के
बाद दूसरे साल 2017 में इनको वापस भी नहीं भेजा गया। भास्कर ने अभियान शुरू
किया तो दुर्गूकोंदल बीईओ ने 30 शिक्षकों को भारमुक्त किया है।
संलग्नीकरण का फायदा कम और समस्या ज्यादा
बायोमेट्रिक्स से अटैच शिक्षकों को खतरा, कार्रवाई की मांग
नवीन शिक्षाकर्मी संघ ब्लाक अध्यक्ष बलविंदर कौर, लालमन पटेल,
गौतम मंडल आदि ने बीआरसी कोयलीबेड़ा रंजन कुमार दास को ज्ञापन सौंपते
एजुपोर्टल में छेड़खानी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की
है। अध्यक्ष ने बताया वर्तमान में विकासखंड कोयलीबेड़ा में कितने शिक्षक
अटैच हैं इसकी जानकारी विभाग के पास उपलब्ध ही नहीं है। एजुपोर्टल के आधार
पर ही शिक्षकों की शाला को तय किया जा रहा है। कुछ शिक्षकों ने साठ गांठ कर
अपने अटैच शाला को ही एजूपोर्टल में मूल शाला में परिवर्तन करा लिया है।
जब बायोमैट्रिक्स शुरू हुआ तो संलग्न शिक्षकों का उसी शाला में मूल स्थान
दिखाया जा रहा है। ज्ञापन देने पहुंचे शिक्षकों ने बताया विकासखंड
कोयलीबेड़ा में कई शिक्षाकर्मी व सहायक शिक्षक अटैच शाला में ही अपनी सेवाएं
दे रहे है। अपनी मूल शाला में आने का नाम ही नहीं ले रहे है। इन शिक्षकों
को उच्चाधिकारियों तथा नेताओं का संरक्षण है जिससे यह फर्जीवाड़ा किया जा
रहा है। अगर विभाग इन शिक्षकों को अपनी मूल शाला में वापस नहीं भेजता तो
संघ सभी शिक्षकों का नाम व उनके अटैच के आदेश को सार्वजनिक कर देगा।
समय पर वेतन पाने बदला विभाग
शिकायतकर्ता शिक्षकों ने बताया हर माह आरजीएम शिक्षकों को वेतन
मिलने में देरी होती है। इस समस्या से निदान पाने कई शिक्षकों ने सांठ गांठ
कर एजूपोर्टल से अपना विभाग बदलवा लिया है ताकि उन्हें समय पर वेतन
प्राप्त हो जाए। इन शिक्षकों की सूची भी संघ के पास मौजूद है।