आश्रम व छात्रावास में तैनात नियमित शिक्षकों को राज्य सरकार ने पूर्णकालिक
अधीक्षक बनने का मौका दिया है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग
ने छात्रावास और आश्रमों में कार्यरत व्याख्याता, उच्च विद्यालय के शिक्षक
और सहायक शिक्षकों को छात्रावास अधीक्षक के तौर पर संविलियन के लिए आवेदन
मांगे है।
आवेदन करने की अंतिम तारीख आज 25 अप्रैल है। लंबे समय से छात्रावासों
और आश्रमों में तैनात शिक्षक अपनी इच्छा के अनुरूप आदिम जाति कल्याण विभाग
के अंतर्गत आने वाले आश्रमों और छात्रावासों में अधीक्षक पद पर संविलियन के
आवेदन दे सकते हैं। पहली बार नियमित शिक्षकों को पूर्णकालिक अधीक्षक बनने
का मौका दिया जा रहा है। विभाग के संचालक जीआर चुरेंद्र ने शुक्रवार को
आदेश जारी कर आवेदन मंगवाए हैं। आदेश के मुताबिक इच्छुक उम्मीदवारों को सात
दिन के भीतर आवेदन करना होगा। विभाग ने अ, ब, स और द श्रेणी के हिसाब से
आवेदन करना पड़ेगा। व्याख्याता, उच्च विद्यालय के शिक्षक और सहायक शिक्षकों
के पदों के अनुरूप ही आवेदन कर पाएंगे।
आश्रम और छात्रावास के पदों को सरकार ने गैर शैक्षणिक संवर्ग में रखा
है। जिसके चलते लगातार इन पदों पर नियुक्ति के लिए रुझान कम हो गया है।
30 नियमित शिक्षक हॉस्टलों व आश्रमों में पदस्थ
वर्तमान में जिले के 187 हास्टल व आश्रमों में 17 एचएम और 13 उच्च
वर्ग के नियमित शिक्षक हास्टल व आश्रम अधीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। ये
स्कूलों से आश्रम व हास्टल में अटैच हो गए हैं। नियमित शिक्षकों के
संविलियन से इनको कोई फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन सरकार को कई तरह के फायदे
होंगे। इसमें अब जहां नियमित शिक्षकों का संविलियन करने से 30 अधीक्षकों को
प्रमोशन नहीं मिलेगा। इसमें नई भर्ती नहीं होगी। नई भर्ती व प्रमोशन नहीं
होने की वजह से शासन को ग्रेच्युटी, पेंशन, यात्रा भत्ता समेत अन्य तरह की
राशि बचेगी।
भर्ती के बाद भी नहीं मिले उम्मीदवार, आधे ने छोड़ दी
: आदिम जाति कल्याण विभाग में जिले में कुल 186 आश्रम व हास्टल
संचालित है। इसमें पोस्ट मैट्रिक 142 और प्री मैट्रिक 44 का संचालन होता
है। पूरे प्रदेश में अधीक्षकों की कमी को देखते हुए विभाग ने 2017 जुलाई
में छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल के जरिए द श्रेणी के रिक्त 819 पदों
की भर्ती परीक्षा करवाई थी। इसमें रायगढ़ जिले में 92 पदों पर भर्ती हुई
थी, लेकिन इस परीक्षा के बाद भी अधिकांश जगहों पर उम्मीदवार नहीं मिल सके।
वहीं कुछ जगहों पर अधीक्षक के पद पर ज्वाइन करने के बाद आधे ने अपनी नौकरी
छोड़ दी थी।