चिरिमिरी. शिक्षा विभाग ने बुधवार को चिरमिरी के बड़ी बाजार शिशु मंदिर में कोरिया जिले के तीन विकासखण्ड के नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर नए शिक्षण सत्र में आरटीई के तहत आने वाले बच्चों की एडमिशन प्रक्रिया की जानकारी दी। वहीं मनमानी फीस लेने, बिना फीस जमा किए परीक्षा से वंचित करने और फीस नहीं जमा करने पर टीसी, उनकी अंकसूची से वंचित करने की शिकायत मिलने पर तत्काल मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी राकेश पाण्डेय,एमआईएस प्रशासक विनय मोहन भट्ट ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य शासन आदेश का हवाला दिया और नए शिक्षण में होने वाले एडमिशन सत्र में आरटीई के अंतर्गत आने वाले बच्चों के महत्वपूर्ण दस्तावेज की जानकारी दी।
Private school owners
उन्होंने कहा कि हर बिन्दुओं की जांच कर संचालित विद्यालय को शासन के आदेश के अनुरूप अपने स्कूलों का संचालन करना होगा। वहीं किसी प्रकार की लापरवाही को नजर अंदाज नहीं करने की हिदायत दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी छोटे बड़े स्कूलों में छात्र छात्राओं के उपयोग के लिए अलग-अलग स्थल व दूरी में शौचालय और मुत्रालय होना अनिवार्य है।
कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से कुछ बदलाव नहीं कर सकता है। बदलाव करने के लिए संचालक को अपने क्षेत्र के नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित जानकारी देनी होगी। सभी स्कूल सीसीटीवी की निगरानी में ही संचालन होंगे। वहीं स्कूल बसों की अवधि 15 वर्षों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इस अवसर पर आरटीई के नोडल अधिकारी अनिल जायसवाल, सहायक विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गुप्ता, प्राचार्य एसकेएस बघेल, एसके तिवारी, डीके उपाध्याय, वेद प्रकाश मिश्रा, बलविंदर सिंह सहित मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर व खडग़वां के शासकीय और अर्धशासकीय स्कूल के शिक्षक-प्राचार्य उपस्थित थे।
सिर्फ बीएड-डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों की होगी भर्ती
अधिकारियों ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों का पुलिस वेरिफिकेशन पहली प्राथमिकता होगी। बीएड और डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों की ही भर्ती होनी चाहिए। वहीं बीते वर्ष की दर्ज संख्या, नए शिक्षण सत्र में एडमिशन की दर्ज संख्या जिला शिक्षा अधिकारी के अवलोकन के बिना मान्य नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि मनमानी फीस लेने, बिना फीस जमा किए परीक्षा से वंचित करने और फीस नहीं जमा करने पर टीसी, उनकी अंकसूची से वंचित करना अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अगर ऐसी शिकायतें किसी भी स्कूल की मिलती है तो तत्काल उसकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।
आरटीई को दो भाग में बांटा गया
डीईओ पाण्डेय ने बताया कि आरटीई के अंतर्गत आने वाले बच्चों को दो भाग में रखा गया है। इसमें अताविद समूह और दुर्लभ समूह के नाम से रखा गया है। अताविद समूह में एसटी एससी, बैगा पण्डो, परंपरागत जाति और विकलांग बच्चे होंगे। वही दुर्लभ समूह के अंतर्गत बीपीएल और एचआईवी से ग्रसित माता-पिता के बच्चों को रखा गया है।
समूहों के बच्चों को एडमिशन के लिए चार से पांच महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जमा करना अनिवार्य होगा। इसमें बच्चे का निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बच्चे के पिता का बिजली बिल, बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, एसटीएससी जाति के बच्चों का जाति प्रमाण पत्र जरूरी है। आरटीई से आने वाले बच्चों का बिना किसी शुल्क के एडमिशन किया जाना है।
सभी मापदण्ड के बाद स्कूलो ंके नवीनीकरण की अवधि बढ़ा दी गई है और 15 अप्रैल 2018 के बाद बंद कर दी जाएगी। निर्धारित समय के बाद प्रति दिन 200 रुपए विलंभ शुल्क देना होगा। वहीं खेलकूद सहित अन्य शुल्क तत्काल जमा कराने कहा गया है।