सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र भी देश, समाज में अपना नाम रोशन कर सकते
हैं। बशर्ते उन्हें उचित शिक्षा मिलनी चाहिए। उचित शिक्षा उन्हें तभी मिल
सकती है, जब शिक्षक अच्छे हों।
अच्छे शिक्षक ही छात्रों के व्यवहार में
सुधार कर सकते हैं। वही उन्हें उनके भविष्य का रास्ता दिखा सकते हैं। इसके
लिए छात्रों के प्रति शिक्षकों को ईमानदार बनाना होगा। यह बातें सजग द्वारा
सहायक संचालक, प्राचार्य व शिक्षकों को हिचकी फिल्म दिखाए जाने के समय
जिला शिक्षा अधिकारी हेमंत उपाध्याय ने कही।
सजग समूह ने शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर आई फिल्म हिचकी को
शिक्षकों को दिखाई। हिचकी फिल्म में दिखाया गया है कि सरकारी स्कूलों में
पढ़ने वाले बच्चों को कितने संघर्षों के साथ शिक्षक बेहतर स्थिति तक ले
जाने का प्रयास करते हैं। सरकारी स्कूलों के बच्चों के घरों में किस प्रकार
की विषम परिस्थितियां होती हैं, इसका बेहतर चित्रण किया गया है। फिल्म
देखने के बाद सहायक संचालक विधि संदीप चोपड़े ने शिक्षकों को बताया कि जो
बात सीखने वाली है कि यदि शिक्षक अच्छे और हार न मानने वाले हैं, तो बच्चे
उनके हो जाते हैं। एक बार बच्चे शिक्षक के हो गए तो सीखने-सिखाने की उनकी
यात्रा बहुत रोचक और मनोरंजक हो जाती हैं। बच्चों को सिखाने की सबसे
प्रभावी विधि उनके अनुभवों, उनके पूर्व ज्ञान से शुरू करना होता है। कक्षा
के भीतर से ज्यादा बच्चे कक्षा के बाहर से सीखते हैं। बच्चों को उनके घर
जाकर मिलना, उनके पालकों से मिलते रहना भी बहुत असरकारी होता है। निजी
स्कूलों में शिक्षक बच्चों को गलकट प्रतियोगिता के लिए तैयार करने में कड़ी
मेहनत करते हैं, खूब मेहनत भी कराते हैं, क्योंकि उन्हें अपने स्कूल के नाम
की चिंता रहती है। परंतु सरकारी स्कूलों में बच्चे खुश रहते हैं। हमें
अपने स्कूलों में आने वाले बच्चों को सिखाने के साथ-साथ खुश रखना चाहिए।
राष्ट्रीय उपलब्धि परीक्षण में हम विभिन्न राज्यों की स्थिति में विगत बार
के अंतिम स्थान से इस बार बीच के स्थान में आ गए हैं। पर अभी हम सबको मिलकर
बहुत कुछ करना है। अभी बहुत आगे जाना है। सजग की टीम ने बिलासपुर जिले के
प्राचार्य, शिक्षकों को अपनी शाला के बच्चों को उत्तम शिक्षा देने के लिए
देखी। इस अवसर पर पी दाशरथि, अश्विनी, संजय बढेरा, मनोज वैद्य, आनंद पांडे,
रवि चारी, युगल शर्मा, शिरीष पांडे, सुनील कौशिक सहित जिले के लगभग 200
प्राचार्य, शिक्षक उपस्थित रहे।