रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन को लेकर नई गाइड
लाइन जारी की है. दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने शनिवार को शासकीय स्कूलों
में कार्यरत पंचायत एवं नगरीय संवर्ग के उन शिक्षकों की सेवाओं का स्कूल
शिक्षा विभाग में संविलियन करने का आदेश आज यहां जारी कर दिया, जिनकी
सेवाएं एक जुलाई 2018 की स्थिति में आठ वर्ष या उससे ज्यादा हो चुकी है।
यह
आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है। रमन सरकार ने विकास यात्रा के दौरान
प्रदेश के शिक्षार्मियों को संविलियन की सौगात दी थी। जिसकी मंजूरी हाल ही
में कैबिनेट से भी मिल गयी।
स्कूल शिक्षा विभाग से जारी आदेश के अनुसार संविलियन की शर्तें इस प्रकार हैं -
(1) संविलियन किए गए शिक्षक (पंचायत/नगरीय निकाय) संवर्ग स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक (एलबी) के नाम से जाने जाएंगे।
(2) स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत पूर्व से संचालित शालाओं में जहां
ई-संवर्ग के शिक्षक पदस्थ हैं, उन शालाओं में पदस्थ पंचायत एवं नगरीय निकाय
संवर्ग के शिक्षक नवीन नाम एलबी संवर्ग के तथा जहां टी - संवर्ग के शिक्षक
पदस्थ हैं, उन शालाओं में पदस्थ पंचायत एवं नगरीय निकाय संवर्ग के शिक्षक
नवीन नाम - शिक्षक टी (एलबी) संवर्ग के अंतर्गत होंगे और इनका कैडर अलग-अलग
होगा।
(3) शिक्षक (एलबी) संवर्ग को एक जुलाई 2018 से सातवे वेतन आयोग की राज्य
शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अनुशंसाओं के अनुरूप वेतन और अन्य
सुविधाएं देय होंगी।
(4) शिक्षक (एलबी) संवर्ग को देय समस्त लाभ के लिए सेवा की गणना संविलियन की तारीख एक जुलाई 2018 से की जाएगी।
(5) दिनांक 01 जुलाई 2018 की पहले की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के एरियर्स की पात्रता नहीं होगी।
(6) शिक्षक (एलबी) संवर्ग को नवीन अंशदायी पेंशन योजना की पात्रता होगी।
(7) शिक्षक (एलबी) संवर्ग की भर्ती, पदोन्नति और सेवा के नियम स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अलग से बनाकर अधिसूचित किए जाएंगे।
(8) किसी भी अन्य विभाग के सेवा एवं भर्ती नियमों में यदि इस आदेश के
तहत निर्मित नियमों से असंगत कोई नियम अथवा प्रावधान हो, तो वे नियम या
प्रावधान इस आदेश के प्रावधानों की सीमा तक संशोधित माने जाएंगे। संबंधित
विभाग इस आदेश के प्रावधानों से संगत अनुकूलन आदेश अपने सेवा भर्ती नियमों
में अविलम्ब शामिल कराएगा और
(9) शिक्षक (पंचायत/नगरीय निकाय) संवर्ग के जारी नियुक्ति आदेश के
विरूद्ध यदि किसी न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है, तो उनका संविलियन
न्यायालय के निर्णय के अध्याधीन रहेगा।