सूरजपुर। जिन्हें संविलियन का असली अर्थ समझना हो वह
इस आदेश को देखें और समझे कि आखिरकार संविलियन के रूप में शिक्षाकर्मियों
ने कितनी बड़ी लड़ाई जीत ली है । हालांकि प्रदेश में वर्षबंधन लागू कर और
पूर्व की नियुक्तियों में अनुकंपा नियुक्ति का लाभ न देकर सरकार ने बहुत से
लोगों को फिलहाल इस लाभ से वंचित कर रखा है लेकिन जिनकी सेवा 8 वर्ष पूर्ण
हो चुकी है वह इस लाभ के दायरे में जरूर आ गए हैं ।
हालांकि यह कोई लाभ
नहीं है लेकिन यह वह सहारा है जिसके लिए सरकारी नौकरी को हमेशा प्राइवेट
नौकरी के ऊपर तरजीह दी जाती है ताकि यदि कोई दुर्घटना घट जाए तो परिवार के
अन्य लोगों को सहारा मिल सके । शिक्षाकर्मी 22 सालों से सेवाएं देते आ रहे
थे बावजूद इसके उन्हें अनुकंपा नियुक्ति के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता था
और टेट और डीएड की पात्रता ने तो हाल यह बना दिया है की 100 में से किसी एक
के ही परिजन को नौकरी मिल पाती है लेकिन संविलियन होने के बाद अब दुर्घटना
घटने की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति में सहायक ग्रेड 3 के पद पर नियुक्ति
दी जा रही है जोकि शिक्षाकर्मियों के लिए बड़ी राहत की बात है । ऐसे ही एक
केस में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरगीडीह विकास खंड लुंड्रा, जिला
सरगुजा में पदस्थ व्याख्याता एलबी शमीम अंसारी के आकस्मिक निधन हो जाने पर
उनकी पत्नी सबीना खातून को सहायक ग्रेड 3 के पद पर शासकीय कन्या हाई स्कूल
नवापारा सूरजपुर में पदस्थ किया गया है । पति के निधन के बाद समस्याओं
में घिरे सबीना खातून और उनके परिवार के लिए यह थोड़ी राहत की बात है ।
संविलियन पा चुके शिक्षा कर्मियों के परिजनों को मिला लाभ
ऐसे शिक्षाकर्मी जिनके निधन के पूर्व उनका संविलियन हो चुका था उसके
संबंध में पूरी जानकारी एकत्रित कर छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक
संघ ने स्कूल शिक्षा सचिव गौरव द्विवेदी से मुलाकात की थी और शिक्षा सचिव
ने उन्हें आश्वासन दिया था की सितंबर माह में ही ऐसी दुर्घटनाओं के शिकार
शिक्षाकर्मियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान कर दी जाएगी और वैसा
ही हुआ । जो सूची शिक्षक संघ के द्वारा स्कूल शिक्षा सचिव को सौंपी गई थी
लगभग उनमें से सभी को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान कर दी गई है और इसके लिए
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने स्कूल शिक्षा सचिव को धन्यवाद ज्ञापित किया है ।
पंचायत विभाग के शिक्षाकर्मियों के लिए भी ऐसी पहल करने की मांग संघ ने
पंचायत सचिव से उसी दिन की है ताकि उनके परिजनों को भी अनुकंपा नियुक्ति का
लाभ मिल सके। अब देखना होगा कि पंचायत विभाग अनुकंपा नियुक्ति के मामले
में दरियादिली दिखाता है या नहीं, जरूरत है इस बात की की पंचायत विभाग के
शिक्षकों के लिए भी ऐसे ही प्रावधान किए जाए ताकि उनके परिजनों को भी उनका
जायज हक मिल सकें ।