Teacher Issue In Chhattisgarh: रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा में भले ही गुणवत्ता के दावे किए जाएं, पर जमीनी स्तर पर ये दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। प्रदेश में पिछले एक साल के भीतर सात हजार से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्तियां तो हुईं, पर अभी प्रदेश में चार हजार से अधिक स्कूलों में एक ही स्थायी शिक्षक नियुक्त हैं।
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Teacher Issue In Chhattisgarh: सात हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती, फिर भी एक शिक्षक के भरोसे चार हजार स्कूल
शिक्षा
अफसरों का दावा है कि यहां दूसरे स्कूलों से शिक्षक संलग्न करके पढ़ाई
करवाई जा रही है, पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि भर्ती के बाद प्राथमिकता के
रूप में इन स्कूलों पर अफसरों की नजर क्यों नहीं गई? नईदुनिया ने पड़ताल की
तो पाया सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता सभी मामले में आदेश जारी होने
के कुछ ही सप्ताह या महीने में संशोधन आदेश भी जारी करके शिक्षकों को उनके
मनचाहे स्कूलों में भेज दिया गया है।
इनमें
लोक शिक्षण संचालनालय से लेकर संयुक्त संचालक स्तर के अफसरों ने संशोधन का
खेल खेला है। मामले में स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला का
कहना है कि कोई आदेश संशोधित नहीं हुआ है।
ये कहते हैं आंकड़े
57 हजार निजी और सरकारी स्कूल प्रदेश में
60 लाख बच्चे इन स्कूलों में अध्ययनरत
4,350 स्कूलों में एकल शिक्षक के भरोसे पढ़ाई
457 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं, अटैचमेंट से काम
87 स्कूलों में शून्य हो गई बच्चों की दर्ज संख्या
78 शिक्षक ऐसे स्कूलों में जहां एक भी बच्चे नहीं
इन जिलों में इतने हैं एकल शिक्षक वाले स्कूल
स्कूल
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक महासमुंद में 273, बलौदाबाजार
85, गरियाबंद 47, रायपुर 16, धमतरी 39, कवर्धा 64, बेमेतरा 5, दुर्ग 22,
बालोद 10, राजनांदगांव 73, बिलासपुर 95, गौरेला-पेंड्रा- मरवाही 64,
मुंगेली 29, कोरबा 265, सक्ती 47, जांजगीर-जांपा 19, रायगढ़ 72, कांकेर
उत्तर-बस्तर में 287, नारायणपुर में 159, कोंडागांव में 438, जगदलपुर में
542, दंतेवाड़ा में 163, बीजापुर में 146, सुकमा 274, कोरिया 174,
बलरामपुर-रामानुजगंज 230, सूरजपुर 241, जशपुर 196 और सरगुजा में 175
स्कूलों में एक ही शिक्षक हैं।
तबादले पर बैन, फिर भी मनमानी पदस्थापना
कोरोना
काल से अब तक लगातार शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्यों का तबादला जारी
है। कुछ दिन पहले कांग्रेस के कुछ विधायकों ने स्वयं स्कूल शिक्षा मंत्री
और उनके निज सचिव अजय सोनी पर तबादला के नाम पर मनमानी पदस्थापना और
भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था।
इसे
लेकर मुख्यमंत्री तक भी शिकायत पहुंची थी। इसके पहले स्कूल शिक्षा विभाग
की ओर से पदस्थ शिक्षा मंत्री के निज सचिव राजेश सिंह को विवाद के बाद
हटाया गया था। वहीं अब वर्तमान में मंत्री के अधीनस्थ विभाग से कोई निज
सचिव नहीं होने से मंत्री को विवादों का सामना करना पड़ रहा है।
सात हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती फिर भी हालत खराब
स्कूल
शिक्षा विभाग ने अब तक व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के सात हजार
188 पदों पर नियुक्ति की है। इसके बाद भी यहां हालत खराब है। स्कूल शिक्षा
विभाग के द्वारा सत्र 2019 में 14 हजार 580 शिक्षकों की भर्ती के लिए
विज्ञापन जारी कर व्यापम द्वारा परीक्षा आयोजित की गई थी। इनमें सात हजार
188 पदों में नियुक्ति आदेश जारी किया जा चुका है।
इसके
अलावा व्याख्याता के विज्ञापित तीन हजार 177 पद में से दो हजार 894 पदों
में नियुक्ति आदेश जारी किया जा चुका है। इसी तरह शिक्षक के पांच हजार 897
विज्ञापित पद में से दो हजार 110 पदों में नियुक्ति आदेश जारी किया जा चुका
है साथ ही सहायक शिक्षकों के विज्ञापित पद पांच हजार 506 पद में से दो
हजार 184 पदों में नियुक्ति आदेश जारी किया जा चुका है।
केस 01
बच्चे ज्यादा शिक्षक कम
रायपुर
के तिल्दा मिडिल स्कूल सोनतरा में 90 बच्चे हैं। यह एकल शिक्षिकीय
विद्यालय है। यहां के विकासखंड शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन का दावा है कि
व्यवस्था करके पढ़ाई कराई जा रही है।
केस 02
शिक्षक ज्यादा, बच्चे कम
प्राइमरी स्कूल बोरियाखुर्द में 200 बच्चों के लिए पहले से ही 13 शिक्षक थे। आरटीई के तहत 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए
केस 04
शिक्षक नहीं इसलिए हायर सेकेंडरी में दाखिला नहीं
आरंग
के हायर सेकेंडरी स्कूल खोरसी का सरकार ने हायर सेकेंडरी के रूप में
उन्नायन कर दिया है। शिक्षक नहीं होने से बच्चे यहां दाखिला नहीं लेते हैं।
भवन भी नहीं है।
व्यवस्था सुधार रहे हैं
जहां
शिक्षक अधिक हैं, वहां से हटाकर उन्हें एकल शिक्षक वाले स्कूलों में पदस्थ
किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया अभी चल रही है। पदस्थापना को लेकर जो भी
शिकायत या आरोप हैं वह सही नहीं है। - डा. प्रेमसाय सिंह टेकाम, मंत्री,
स्कूल शिक्षा
खोल रखा है पदस्थापना उद्योग
कांग्रेस
सरकार ने शिक्षा विभाग में स्थानांतरण उद्योग खोल रखा है। बस्तर और
कोंडागांव जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाकों से शिक्षकों को शहर में लाया जा रहा
है। इसके बदले शिक्षकों को भेजा नहीं जा रहा है। - केदार कश्यप, पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन