शिक्षा किसी भी राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करती है और शिक्षक इस पूरी व्यवस्था की सबसे मजबूत धुरी होते हैं। यह बात छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री चौधरी ने एक शिक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उनके इस बयान ने शिक्षा सुधार, शिक्षक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था के बिना किसी भी देश की प्रगति संभव नहीं है। शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज में सोच, संस्कार और जिम्मेदारी विकसित करती है। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक वह आधार हैं, जो विद्यार्थियों को सही दिशा देकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करते हैं।
उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित न मानते हुए कहा कि शिक्षक छात्रों के चरित्र निर्माण, नैतिक विकास और सामाजिक चेतना में भी अहम योगदान देते हैं। एक प्रेरक शिक्षक ही छात्र को आत्मनिर्भर, अनुशासित और देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक बना सकता है।
वित्त मंत्री चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और समय के अनुसार प्रशिक्षित करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान और उनके कार्य वातावरण को बेहतर बनाना बेहद जरूरी है। जब शिक्षक सशक्त होंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और उसका सीधा लाभ छात्रों और समाज को मिलेगा। शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देशभर में शिक्षा सुधार, शिक्षक नियुक्ति, शिक्षा बजट और गुणवत्ता आधारित शिक्षा पर चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षक केंद्र में रहेंगे, तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव निश्चित है।
कुल मिलाकर, वित्त मंत्री का संदेश साफ है कि शिक्षा से ही राष्ट्र का भविष्य बदला जा सकता है और शिक्षक उस परिवर्तन की सबसे मजबूत कड़ी हैं। आने वाले समय में शिक्षा और शिक्षकों को प्राथमिकता देने वाली नीतियां देश के दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।