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अरे ये क्या... गए थे रोजगार कार्यालय में ताला बंद करने, पुलिस ने उठा-उठाकर पटका

रायगढ़. जिले में बेरोजगारी का आंकड़ा और शिक्षक भर्ती के लिए अन्य राज्यों से की जाने वाली आउट सोर्सिंग के विरोध में युवा कांग्रेसियों ने जिले के रोजगार कार्यालय में ताला जडऩे की कोशिश की पर वो सफल नहीं हो सके।


पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच पुलिस ने युंकाईयों को उठा-उठाकर वाहनों में भर दिया और कंट्रोल रूम लेकर चली गई।कांग्रेस के प्रदेशव्यापी धरना प्रदर्शन के तहत युवा कांग्रेसियों ने सोमवार को रायगढ़ जिला रोजगार केंद्र में ताला जडऩे की कोशिश की पर वो कामयाब नहीं हो सके।

लगभग 50 से 60 की संख्या में एनएसयूआई के कार्यकर्ता नई मरीन ड्राइव स्थित नए रोजगार कार्यालय के भवन में ताला जडऩे पहुंच गए थे। वहीं इनके प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की ओर से भी चाक-चौबंद तैयारी की गई थी। इन हालात में कार्यालय के पहले बनाए गए बैरिकेट्स के पास ही इनके जत्थे को रोक दिया गया।

कुछ देर तक तो नारेबाजी होती रही इसके बाद कार्यकर्ता बैरिकेट्स को तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमा-झटकी की स्थिति निर्मित हो गई। कुछ देर बाद जब कार्यकर्ता संभले नहीं संभल रहे थे तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर वहां से एक एक कर उठा-उठाकर पुलिस वाहनों में भरने लगी। लगभग अधिकांश कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इस बीच कांग्रेसियों का कहना था कि एक तो प्रदेश सरकार प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को रोक नहीं पा रही है दूसरी ओर जो सीट यहां हैं उसमें अन्य राज्यों से आउटसोर्सिंग कर के भरने की कोशिश की जा रही है इन हालात में प्रदेश के बेरोजगार कहां जाएंगे। कांग्रेसियों का यह प्रदर्शन दिन के लगभग 12ण्30 बजे आरंभ हुआ जो कि 15 से बीस मिनट तक ही चल सका। पुलिस की भारी संख्या के बीच कांग्रेसियों का जोर नहीं चल सका और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और कार्यालय में ताला बंद नहीं करने दिया गया।

क्या है स्थिति- जिले में उद्योगों की स्थापना के बाद यह दावा किया जा रहा था कि इस जिले का काया पलट हो जाएगा। बेरोजगार हाथों को काम मिलेगा और उनके घर में खुशहाली आएगी। लेकिन सच्चाई इन दावों की हवा निकाल रहे हैं। अनुभव और तकनीक के नाम पर इन बेरोजगारों से कन्नी काटी जा रही है। जबकि सरकार की ओर से भी इन्हें कुशल बनाने की योजना तो है पर इच्छा शक्ति का आभाव इस जिले में आयोजित रोजगार मेले ने स्पष्ट कर दी है।

इन हालात में साल 1991 से जिले में उद्योगों की तो बाढ़ आई, 42 बड़े उद्योगों की स्थापना हुई लेकिन बेरोजगारी या गरीबी अपने स्थान पर जस की तस रहने की बजाए यह भी बढ़ती चली गई। यदि आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यह बात आसानी से समझ में आ रही है। ऐसे में फूड विभाग से मिली जानकारी के अनुसार साल 1991 में जिले में बीपीएल परिवारों की संख्या लगभग एक लाख के आसपास थी। जबकि साल 2011 तक इन परिवारों की संख्या बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है।

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