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स्कूलों की निगरानी के लिए मिला टैबलेट बिना नेटवर्क के पहले दिन व्यवस्था फेल

डीईओ कार्यालय में मंगलवार को शासन के शाला कोष योजना के तहत जिले के 93 संकुल समन्वयकों को टैबलेट दिया गया। इससे स्कूलों की ऑनलाइन निगरानी होनी है। पर बिना नेटवर्क के पहले दिन से ही योजना की पोल खुल गई। टैबलेट को जन उन्नति पेड नाम दिया गया है।
जिसमें पहले से एयरटेल या आइडिया कंपनी का सिम लगा हुआ है। जिस इलाके में दोनों कंपनी का नेटवर्क रहेगा, वही ये काम करेगा।

पहले दिन ही जब शिक्षकों ने इसे चालू करके देखा तो नेटवर्क नहीं बता रहा है। इससे शिक्षक परेशानी में है कि इससे कैसे काम करेंगे। वही एडीईओ जे मनोहरन ने कहा टैबलेट ऑनलाइन ही काम करेगा। ऑफलाइन की सुविधा इसमें नहीं है। शिक्षक को रोज की जानकारी अपडेट करनी पड़ेगी। जिन इलाकों में नेटवर्क नहीं रहता, वहां परेशानी हो सकती है।

कोड डालने के बाद भी नहीं दिखा रहा कोई जानकारी:

बालोद के समन्वयक जितेन्द्र गजेन्द्र ने कहा कि अपना पासवर्ड डालकर टैबलेट चालू तो कर लिया। पर जब मैंने हीरापुर स्कूल का यू डाइस कोड डाला तो नेटवर्क नहीं होना लिखा और कोई जानकारी नहीं मिली।

ये है सरकारी टैबलेट में दी गई सुविधा

इसमें बायोमेट्रिक मशीन लगी है। ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होगी। शिक्षकों को नेटपेक नहीं डलवाना पड़ेगा। ये शालाकोश योजना से ऑनलाइन कनेक्ट है। इसमें जीपीएस लगा है। इस कारण शिक्षक अब अपने लोकेशन नहीं छिपा सकेंगे। 64 जीबी बाहरी मेमोरी व 16 जीबी भीतरी मेमोरी है। इन सभी के अलावा सरकारी टैबलेट में कैमरा, ब्लूटूथ, वाई फाई कनेक्ट की भी सुविधा दी गई है।

बालोद. डीईओ आॅफिस में टैबलेट मिलने के बाद चेक करते हुए शिक्षक।

इसलिए दिया जा रहा है टैबलेट

स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्कूल प्रबंधन का सारा रूटीन कामकाज अपडेट हो सके। मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति से जुड़ी स्टूडेंट्स की जानकारी अपडेट की जा सके। बच्चों के शैक्षणिक प्रगति और गतिविधियों के संबंध में जानकारी अपलोड की जा सके। सभी स्कूलों में केंद्र की योजनाओं की हर महीने मॉनीटरिंग की जा सके।

जिले के खासकर गुरुर, डौंडी व डौंडीलोहारा ब्लाॅक के जंगल इलाके के स्कूल में किसी भी कंपनी, यहां तक कि बीएसएनएल का भी नेटवर्क नहीं रहता। ऐसे में वहां के शिक्षक चिंता में पड़ गए है कि कैसे काम होगा। मंगलतराई के समन्वयक विशाल राम निषाद ने कहा मेरे इलाके में आइडिया, एयरटेल दोनों का नेटवर्क नहीं रहता। ऑफलाइन काम करने का भी विकल्प नहीं है। डाटा को अपलोड करने नेटवर्क तलाशना पड़ेगा।

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