जिले में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की क्वालिटी में सुधार नहीं के बराबर हो रहा है। जिले के सिर्फ 22.22% टीचर ही अपनी बात प्राइमरी और मिडिल स्टैंडर्ड के बच्चों को समझा पाते हैं। यही नहीं, 8.97% शिक्षकों को तो पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाना भी नहीं आता। 31.62% टीचर सामान्य स्टैंडर्ड के हैं। इनसे बेहतर की उम्मीद है।
इसका खुलासा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) की रिपोर्ट से हुआ है। डाइट अब टीचरों को बेहतर ढंग से ट्रेनिंग देगा। इसकी तैयारी पूरी हो गई है। जबकि, शिक्षा विभाग का दावा है कि इस साल की रिपोर्ट पहले से बेहतर है। काफी कुछ सुधार हुए। बता दें कि हाल ही में हुई नेशनल अचीवमेंट सर्वे में भी जिले की स्थिति खराब है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में आठवीं के 66% बच्चों को गणित हल करने नहीं आता है। अब इसकी वजह का खुलासा डाइट की रिपोर्ट से भी हो रही है। इसे सुधारने काम किया जाएगा।
234 स्कूल में गई डाइट की 7 टीम, फिर सामने आई ये रिपोर्ट
सरकारी स्कूल में डाइट की जांच टीम ने स्कूली बच्चों से भी लिया टीचर्स का फीडबैक।
31.62% टीचर स्कूलों में औसत पढ़ाई करा रहें है।
8.97%
22.22% शिक्षक ही अच्छे से समझा पा रहें बच्चों को।
शिक्षकों को तो दिए गए विषय पढ़ाने ही नहीं आ रहें।
37.17% शिक्षकों की स्थिति सुधरी है डाइट के आने के बाद।
एक स्कूल में तो एचएम और बच्चों को 100 से 99 भी घटना नहीं आया
स्कूलों में पढ़ाई का स्तर किस तरह खराब है इसका एक उदाहरण भी जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के पास है। बताया कि शासकीय प्राथमिक शाला थनौद में बच्चे से 100 में से 99 घटाने कहा। लेकिन बच्चे उसे घटा नहीं सके। उसके बाद गणित के टीचर को भी यही सवाल दिया, लेकिन उनसे भी यह सवाल हल नहीं हुआ। अंत में स्कूल की हेडमास्टर को यह सवाल दिया गया लेकिन हेडमास्टर भी 100 में से 99 नहीं घटा सके।
आखिर पहली से आठवीं में ये स्थिति क्यों बनी, जानिए असल वजह...
शिक्षकों में कौशल और दक्षता का परीक्षण नहीं किया जाता। ट्रेनिंग में सिर्फ खानापूर्ति करते हैं।
सरकार की ओर से शासकीय कार्यों में भी इनकी ड्यूटी लगाई जाती है। इसका भी प्रभाव पड़ता है।
प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर टीचरों का सालाना मूल्यांकन करना अनिवार्य होना चाहिए।
टीचर जिम्मेदारी से नहीं पढ़ा रहे स्कूलों में।
समर्पण की भावना लगभग खत्म सी हो गई है।
पढ़ाई के अलावा टीचरों से काफी काम भी लिए जाते है जिसका भी असर होता है।
( शिक्षाविद् डॉ. डीएन शर्मा के अनुसार)
695 स्कूलों में अभी और सर्वे करेगी डाइट की टीम
दुर्ग जिले में 585 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक 341 स्कूल है। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान ने 2017-18 में स्कूलों में जाकर टीचरों को ट्रेनिंग और उनकी स्थिति को जांचने का काम किया है। 234 स्कूलों में जांच हुआ है। अभी भी 695 स्कूलों के टीचर की रिपोर्ट कार्ड आने बाकी है। चौंकाने वाले आंकड़े और मिलेंगे।
पहले से सुधरी व्यवस्था...
जिले के कुछ शिक्षकों में कमियां हो सकती है, जिसे सुधारने का काम किया जा रहा है। पहले से स्कूल एजुकेशन की स्थिति काफी सुधरी है। अब इसे सुधारा जाएगा। आशुतोष चावरे, डीईओ, दुर्ग
मार्किंग कर देंगे ट्रेनिंग...
ऐसेे टीचरों की मार्किंग की जा रही है, जो विषय को नहीं पढ़ा पा रहें है। डाइट के आने से जिले में पढ़ाई का स्तर सुधरा है। अभी भी कमियां है जिनको सुधारने की जरूरत है। डॉ. एम पसीने, प्रिंसिपल, डाइट दुर्ग