श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, जुनवानी भिलाई में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी
शिक्षा संस्थान की ओर आयोजित डीएलएड का प्रशिक्षण चल रहा है, जिसमें
सरकारी एवं निजी विद्यालय के प्रशिक्षणार्थी शामिल हो रहे हैं। इन
प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण के लिए 12 दिवसीय कार्यशाला हुई है।
इसमें
उनको पाठ योजना, प्रश्नपत्र बनाना, ब्लू प्रिंट निकालना, शिक्षण सामग्री
बनाना और अन्य आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थियों ने
शिक्षण अधिगम सामग्री की प्रदर्शनी लगाई। इसका उद्घाटन जिला शिक्षण
प्रशिक्षण संस्थान की निदेशक एवं प्राचार्य मंजुलता पसीने ने किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को वर्क बेस्ड एक्टीविटी पर अधिक ध्यान देना
चाहिए। विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए इसकी महत्ता बताई। इससे शिक्षक
विद्यार्थियों को स्वप्रेरित कर सकता है। एनआईओएस से दी जाने वाली डिग्री
कोई साधारण डिग्री नहीं है अपितु यह राष्ट्रीय स्तर पर मान्य है। इसके आधार
पर शिक्षक देश में कहीं भी काम कर सकते हैं। इससे उन्हें फायदा ही होगा।
इसके अलावा वे नई पीढ़ी को अपने तरीके से नॉलेज देते हुए गढ़ सकेंगे। इसका
लाभ पूरे समाज को मिलेगा। राष्ट्र निर्माण में भी सहायता मिलेगी। इस दौरान
भावी शिक्षकों ने चार्ट और मॉडल भी प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने
सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीरा पांडेय ने
सभी विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए शिक्षण अधिगम सामग्री और प्रायोजित
कार्यक्रम की सराहना की। इस अवसर शिल्पी त्रिपाठी (केपीएस) और नेहा शर्मा
(माइल स्टोन एकेडमी) आदि उपस्थित थीं।
पढ़ाई में प्रैक्टिकल है जरूरी : डॉ. रक्षा सिंह
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रक्षा सिंह ने शिक्षा
में हो रहे नीत नवाचारों पर रोशनी डालते हुए उसके अधिकाधिक प्रयोग के लिए
प्रोत्साहित किया। महाविद्यालय के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जे दुर्गा प्रसाद
राव ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर शिक्षक की भूमिका के बारे में
बताया। इस अवसर पर शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों ने रंगारंग प्रस्तुति दी।