प्रदेश में 23 साल बाद कल और परसों एक साथ 1 लाख 3 हजार शिक्षाकर्मियों का शिक्षकों के संवर्गीय पदों पर संविलियन किया जाएगा। शिक्षा विभाग इनका डाटा, शासकीय कर्मचारियों का वेतन प्रदाय किये जाने वाले “ई-कोष” पोर्टल में पंजीयन कराकर एक नया रिकॉर्ड भी बनाने जा रहा है।
इतना ही नहीं राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि निम्न से उच्च पद पर कार्यरत शिक्षक पद पर संविलियन के लिए सेवाकाल गणना निम्न पद पर कार्यभार ग्रहण के दिनांक से की जायेगी। वहीं लंबित आवेदनों पर एनओसी जारी कर दिए जाने का प्रत्याशा में सेवाकाल की गणना निम्न पद पर कार्यभार ग्रहण के दिनांक से की जायेगी।
संविलियन को लेकर अलग अलग जिलों में अलग अलग नियम व शर्तें रखकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा था। इससे विवाद और शिक्षाकर्मियों के बीच गहरी निराशा छा गई थी। इसे लेकर शालेय शिक्षाकर्मी संघ के नेताओं ने संचालको से मिलकर प्रदेश से समस्त नियमो व शर्तों में एकरूपता के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया था।जिसके कारण आज संचालनालय में समन्वय समिति की बैठक रखी गई थी जिसमे निम्न समस्याओं के समाधान निकाल लिए गए हैं। और उसके स्पष्ट आदेश भी जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जिन शिक्षाकर्मियों ने एनओसी प्राप्त करने के बाद ग्रामीण निकाय से नगरीय निकाय या नगरीय निकाय से ग्रामीण निकायों में निम्न से उच्च पद पर नियुक्त हुए हैं, उनके लिए सेवाकाल की गणना उच्च पद पर कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से की जायेगी।
ट्रांसफर, पोस्टिंग शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी
ट्रांसफर आपसी सहमति और अतिशेष शिक्षक के समायोजन का जिम्मा भी भविष्य में शिक्षा विभाग के पास ही होगा। 8 वर्ष वाले समस्त अप्रशिक्षित शिक्षाकर्मियों का भी संविलियन किया जायेगा। अप्रशिक्षित शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय संवर्ग को वेतन वृद्धि का लाभ हाईकोर्ट में लंबित याचिका में पारित निर्णय के अधीन होगा। तब तक एक वेतन वृद्धि देकर ही सातवाँ वेतनमान का निर्धारण किया जाएगा ।सीनियरिटी का निर्धारण जीएडी के निर्देश पर किया जायेगा। स्थानांतरण और पदोन्नति प्राप्त शिक्षाकर्मियों का प्रथम नियुक्ति से ही गणना करके संविलियन किया जाएगा। जिनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, उनकी जांच अब शिक्षा विभाग के अधिकारी करेंगे, हालांकि फिलहाल इसका असर संविलियन पर नहीं होगा।