ग्राम डूमरकोट के प्राथमिक शाला एक शिक्षक के भरोसे चला रहा है। यहां दो
शिक्षकों की पदस्थापना की गई थी, लेकिन 2015 से एक सहायक शिक्षक पंचायत
स्कूल पहुंचा ही नहीं। इसके चलते यह स्कूल एक शिक्षकीय हो गया। ग्रामीणों
ने बताया कि स्कूल में सहायक शिक्षक पंचायत लिलेश्वर महावे की पदस्थापना की
गई थी। वह 2015 से स्कूल नहीं पहुंच रहा है।
वहीं उसे 2016-17 में तहकाल
प्राथमिक शाला में अटैच कर दिया गया और बाद में उसे सहायक संकुल समन्वयक
बना दिया। अभी उसे सरकार द्वारा शुरू किए गए इंग्लिश स्कूल अंतागढ में ही
पदस्थ कर दिया गया है। तहकाल स्कूल में भी दर्ज संख्या मात्र 10 है और
शिक्षक 4 थे। इसमें चारों शिक्षक अटैच कराकर वहां पदस्थ हो गए थे। लेकिन
कोई भी शिक्षक स्कूल नहीं जाता था।
इस मामले को भास्कर द्वारा उठाए जाने पर फरवरी में दो शिक्षक पंचायत को
तहकाल स्कूल से हटाया गया था। इसमें लिलेश्वर महावे को वापस डूमरकोट भेजा
गया था, लेकिन उसने स्कूल में ज्वाइनिंग नहीं की। इसी बीच उन्हें बीईओ व
एबीईओ द्वारा बोर्ड परीक्षा के उड़नदस्ते टीम में शामिल कर दिया गया। अब
शिक्षा सत्र शुरू हुए माहभर होने जा रहा है, लेकिन शिक्षक डूमरकोट नहीं
पहुंचा है। उप सरपंच प्रेम सिंह मंडावी ने बताया 15 जून से स्कूल खुला है।
शिक्षक एक दिन भी स्कूल नहीं गया। बीईओ व एबीईओ की मेहरबानी के चलते शिक्षक
बिना कार्य किए ही वेतन ले रहा है। ऐसे शिक्षक पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल्द ही जिला प्रशासन लापरवाह शिक्षक पर कार्रवाई नहीं
करता है, तो ग्रामीणों द्वारा अंतागढ़ में आंदोलन किया जाएगा
डीईओ को लिखा गया है पत्र : बीईओ एमन जैन ने बताया सहायक शिक्षक पंचायत
को डूमरकोट भेजने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा गया है। उक्त
सहायक शिक्षक पंचायत को अंतागढ़ इंग्लिश स्कूल में पदस्थ किए जाने का पालकों
ने भी विरोध किया है।
अंतागढ़। ये सभी बच्चे डूमरकोट के प्राथमिक शाला के हैं, जोे एक शिक्षक के भरोसे कर रहे पढ़ाई।
इंग्लिश स्कूल में किया पदस्थ
लापरवाह सहायक शिक्षक पंचायत को अब सरकार द्वारा शुरू किए गए
अंतागढ़ के ही सरकारी इंग्लिश स्कूल में पदस्थ कर दिया गया है। शिक्षक के
स्कूल में पदस्थ होते ही पालकों ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
पालकों ने कहा कि जो शिक्षक अपने शाला में नियमित नहीं जाता उन्हें इंग्लिश
पढ़ाने के लिए यहां पदस्थ कर दिया गया है।