जिले में स्कूलों का उन्नयन हर साल किया जा रहा है। उसके अनुसार सुविधाएं
नहीं बढ़ रही हैं। अधिकांश उन्नयन स्कूल तो वहीं लग रहे हैं जहां पहले लग
रहे थे। न भवन मिले हैं न ही शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। जिसका प्रभाव
वहां पढ़ने वाले छात्रों के रिजल्ट पर पड़ रहा है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में 85 मिडिल हाईस्कूल
हो गए हैं। उन्नयन करने के 4 साल बाद भी वहां अब तक सेटअप के अनुसार
शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई है। यहीं नहीं अधिकांश स्कूल तो अभी
पुराने मिडिल स्कूल के भवन में ही लग रहे हैं। कहीं भवन नहीं मिला है तो
कहीं शिक्षक। 38 हाई स्कूलों में गणित व विज्ञान विषय के व्याख्याता ही
नहीं पदस्थ किए जा सके हैं। इस बार भी भर्ती नहीं हुई तो उन स्कूलों का
रिजल्ट प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। एक फायदा जरूर इन
स्कूलों के छात्र-छात्राओं को हुआ है। वह यह कि उन्हें दूसरे गांव में
स्थित हाई स्कूल में पढ़ने नहीं जाना पड़ रहा है। अब वे अपने ही गांव के उसी
स्कूल में पढ़ रही हैं जहां से मिडिल पास किया है। शासन लगातार जिले से
प्रस्ताव मंगाकर स्कूलों का उन्नयन करता जा रहा है। स्कूलों के संचालन के
लिए बुनियादी सुविधाओं की ओर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कई बार तो
भर्ती होने पर नियुक्त शिक्षक गांव के स्कूलों में नहीं जाना चाहते। इस
कारण भी कई स्कूलों में पद रिक्त हैं।
प्रमोशन लेकर भी नहीं जाना चाहते
शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया नहीं होने से स्कूलों में कमी बनी
हुई है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में उच्च श्रेणी शिक्षकों को बतौर
व्याख्याता प्रमोशन देकर भेजा जा रहा है। लेकिन वे भी प्रमोशन लेकर दूरस्थ
गांव में स्थित स्कूल में जाने की बजाय नजदीकी स्कूलों में ही रहना पसंद कर
रहे हैं। यही नहीं जो पदस्थ हैं वे पूरे समय स्कूल में नहीं रुकते।
क्योंकि वहां तक नियमित निरीक्षण संभव नहीं होता।
इन हाई स्कूलों में है शिक्षकों कमी
मिडिल से हाई स्कूल में उन्नयित होने वाले हाईस्कूल कर्री,
आमाटिकरा, पतुरियाडांड, गढ़उपरोड़ा, सीतामढ़ी, बड़ेबांका, मदवानी ऐसे स्कूल हैं
जहां बीते 4 साल से विज्ञान पढ़ाने वाला कोई नहीं है। तो सपलवा पोटापानी,
लैंगी, सरभोंका, अयोध्यापुरी, दर्री, मड़वाढोढ़ा, सुमेधा, दादर, कोहड़िया व
अन्य स्कूलों में गणित विषय के शिक्षक नहीं हैं। मदवानी, पतुरियाडांड समेत
कई हाईस्कूलों में तो विज्ञान व गणित दोनों ही विषय के व्याख्याता नहीं
हैं।
विद्या मितान की मदद
डीईओ डीके कौशिक ने बताया कि जिन स्कूलों खासकर ग्रामीण अंचल में
शिक्षकों कमी पूरा करने बीते सत्र से विद्या मितान की मदद ली जा रही है।
संविलियन के बाद नए विकल्प के तहत रिक्त पदों को भरने प्रक्रिया अपनाई
जाएगी।