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बड़े शहर टापर्स के लिए तरसे, रायगढ़-जांजगीर से थोक में निकले मेधावी

रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने दसवीं बोर्ड के नतीजे गुरुवार को घोषित कर दिए। इस बार भी बड़े शहरों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग -भिलाई और कोरबा को टापर्स के लिए तरसना पड़ा है। रायगढ़ और जांजगीर से थोक में बच्चे मेरिट लिस्ट में आए हैं।
रायगढ़ से सबसे ज्यादा आठ और जांजगीर से पांच बच्चों ने टॉप टेन में जगह बनाई है। ओवरऑल नतीजे में पिछले बरसों का ट्रेंड बना हुआ है। दसवीं बोर्ड में कुल 55.32 फीसदी बच्चे सफल हुए हैं। यही वजह है कि स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप इस सफाई के साथ रिजल्ट घोषित किए कि अब विभाग का फोकस क्लास रूम होगा। उनका कहना था कि अभी तक सरकार का पूरा ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर जुटाने में था। टॉपटेन की सूची में शामिल 28 टापर्स में से केवल 4 मेधावी ही सरकारी स्कूलों के हैं, बाकी स्टूडेंट्स निजी संगठनों व संस्थाओं के हैं।

इतने हुए थे शामिल

10वीं की परीक्षा में इस साल चार लाख 26 हजार 824 विद्यार्थी पंजीकृत हुए थे, जिनमें से चार लाख 21 हजार 333 विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिसमें दो लाख 24 हजार 209 छात्र और एक लाख 97 हजार 124 छात्राएं शामिल है। दो लाख 32 हजार 587 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। इस बार भी छात्राओं ने बाजी मारी है। 55.75 प्रतिशत बालिकाएं और 54.84 प्रतिशत बालक पास हुए हैं।

रायगढ़ से सर्वाधिक टॉपर्स

रायगढ़ में सबसे अधिक 8, जांजगीर से 5, रायपुर,दुर्ग, बालोद, कोरबा और बलौदाबाजर से दो-दो बच्चों ने टॉप किया है। जबकि मुंगेली,महासमुंद,धमतरी, कवर्धा और बिलासपुर से एक-एक स्टूडेंट्स मेरिट लिस्ट में हैं।

8 फीसदी प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी की संख्या घटी

इस बार पिछले साल की तुलना में 5 हजार 875 यानी 8 फीसदी प्रथम श्रेणी के छात्र घट गए हैं। जबकि द्वितीय श्रेणी में 15 फीसदी की गिरावट है। इस साल 49 हजार 537 (11.78 प्रतिशत) विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। इसी प्रकार 86 हजार 494(20.53 प्रतिशत) विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी से और 94 हजार 485 विद्यार्थियों को तृतीय श्रेणी और 2071 परीक्षार्थियों को पास की श्रेणी में उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। बोर्ड ने 38 हजार 405 परीक्षार्थियों को पूरक घोषित किया गया है। जबकि पिछले साल 2015 में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले 43 हजार 662(19.68 प्रतिशत) थे। द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या 78 हजार 660(35.45 प्रतिशत) थी।

एजुकेशन हब का नाम है लेकिन अब रायपुर, दुर्ग-भिलाई जैसे शहरों के स्कूलों की उपेक्षा की जा रही है। यहां के बच्चों का अच्छा परफार्मेस नहीं होने से छवि धूमिल हो रही है। निजी स्कूलों का परचम ऊंचा रहता है। सरकारी स्कूलों का स्तर अभी तक नहीं सुधरा। इसकी वजह यहां शिक्षाकर्मियों के भरोसे चल रहे स्कूल हैं। नियमित शिक्षक और इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में शिक्षा बेहतर तरीके से नहीं हो पा रही है। सरकार को मॉनिटरिंग करने की जवाबदारी तय करनी चाहिए। गुणवत्ता के लिए चिंतन भी नहीं हो रहा है।

- प्रो. एसएन अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, निजी विवि आयोग

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