; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Advertisement

अपने बदले दूसरे को भेज देते थे स्कूल, अब नोटिश बोर्ड में लगेगी फोटो, यही हैं तुम्हारे शिक्षक

जगदलपुर। ग्रामीण क्षेत्र के अंदरूनी इलाकों के सरकारी स्कूलों में छद्म शिक्षक भी अध्यापन कराते हैं। इन छद्म शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिए अपने वेतन से कुछ रुपए देकर सरकारी शिक्षक और शिक्षक पंचायत संवर्ग के कर्मचारी नियुक्त करते हैं और खुद कई-कई दिनों तक स्कूलों से गायब रहते हैं।
यह बात खुद राज्य शासन ने स्वीकार की है और इस व्यवस्था की कमर तोड़ने स्कूलों में नए शिक्षा सत्र से ओरिजनल शिक्षकों की फोटो लगाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, कहा गया है कि ओरिजनल शिक्षकों की फोटो सूचना पटल में चस्पा कर इन्हें शाला परिवार का सदस्य बताया जाए ताकि ओरिजनल और छद्म शिक्षकों को पंचायत प्रतिनिधि और आम ग्रामीण भी पहचान सकें और समय-समय पर स्कूल जाकर शिक्षकों का सत्यापन कर सकें। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन एमके राउत ने प्रदेश के सभी सीईओ जिला एवं जनपद पंचायतों को 10 जून को पत्र जारी किया है। आदेश बस्तर के जिला और जनपद पंचायतों को भी मिला है। पत्र में शिक्षा विभाग से मिली रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्र के अंदरूनी इलाकों में स्थित कई सरकारी स्कूलों में कई-कई माह तक शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं। स्थानीय शिक्षित अथवा अल्प शिक्षित व्यक्ति को एवजीदार शिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया जाता है। ऐसे छद्म शिक्षकों की वजह से भी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
बस्तर बदनाम है एवजीदार शिक्षक के लिए
नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के अंदरूनी क्षेत्रों के कतिपय सरकारी स्कूलों में एवजीदार शिक्षकों की चर्चा आम है। उल्लेखनीय है कि यहां अंदरूनी क्षेत्र में कई-कई माह तक शिक्षकों के स्कूलों से गायब रहने की शिकायतें चर्चा में रही हैं। कहा जाता है कि कुछ शिक्षक तो ऐसे हैें जो राष्ट्रीय त्योहारों गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस के दिन ही स्कूल जाते हैं। अन्य दिनों में इनके स्थान पर हजार-पांच सौ रूपए पर नियुक्त शिक्षित अथवा अल्प शिक्षित व्यक्ति एवजीदार के रूप में अध्यापन कराते हैं। बस्तर के स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भृत्य, रसोइया आदि के द्वारा भी अध्यापन कराने की खबरें अब तक आती रही हैं।

Sponsored link :
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC

UPTET news

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();