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खुले में शौच करनेे से रोकने के लिए लगी शिक्षकों की ड्यूटी! भड़के गुरु

राजनांदगांव. खुले में शौच रोकने शिक्षकों की ड्यूटी के जिस फरमान से राजस्थान शर्मसार हुआ था, वैसा ही फरमान यहां छत्तीसगढ़ के डोंगरगांव में जारी हुआ है। एसडीएम ने आदेश जारी कर शिक्षकों को सुबह-शाम गांव में खुले में शौच करने वालों की न केवल निगरानी करने कहा है, बल्कि उनकी रिपोर्ट भी मांगी है। इस फरमान से गुरुओं में गुस्सा है। उन्होंने आदेश को शर्मनाक बताया।
 
यहां यह बताना लाजिमी है कि राजस्थान का फरमान सोशल मीडिया में आते ही देशभर में उपहास का कारण बना था। इसके बावजूद यहां राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक में इसी तरह के आदेश ने हंगामा खड़ा कर दिया है। इस ब्लॉक को खुले में शौच से मुक्त कराने प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां चल रही है। काम भी ठीक हो रहा है, लेकिन इस आदेश ने विवाद खड़ा कर दिया है।
 
ओडीएफ ब्लॉक बनने के पहले डोंगरगांव एसडीएम अविनाश भोई ने 9 जून को एक आदेश जारी कर ब्लॉक के सभी स्कूलों के प्रधान पाठक, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, नि:शक्तजन कार्यकर्ता और कोटवारों को सुबह और शाम मार्निंग फालोअप लेने की जिम्मेदारी सौंपी है।
 
आदेश में यह कहा गया है कि वे सुबह और शाम को गांवों का दौरा कर यह चेक करें कि ग्रामीण अपने घरों में बने शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं या नहीं, वे खुले में तो नहीं बैठ रहे। निरीक्षण के बाद प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश से शिक्षक संगठनों में बेहद आक्रोश की स्थिति निर्मित हो गयी है। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा सत्र के शुरू होने के पहले ही प्रशासन ने उन्हें दूसरे कामों में लगा दिया है। शिक्षकों का कहना है कि इस आदेश से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।
 
शिक्षक संगठनों ने खोला मोर्चा

डोंगरगांव एसडीएम द्वारा जारी किए गए इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। शिक्षक संगठनों ने साफ तौर पर कहा है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने का काम दिया गया है, लेकिन अधिकारियों द्वारा सत्र के शुरू होने के चार दिन पहले ही शिक्षको की ड्यूटी दूसरे कामों में लगा दी गई है। छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षाकर्मी संघ के प्रांतीय महामंत्री शैलेन्द्र यदु का कहना है कि यदि आदेश निरस्त नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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