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नक्सलियों के गढ़ में ऐसे पढ़ते हैं बच्चे, 9 साल बाद भी नहीं है भवन

औरंगाबाद। देश में शिक्षा प्रणाली कैसी है और राज्य का शिक्षा विभाग कैसा है। इस सत्य से तो सभी वाकिफ है। लेकिन क्या राज्य की सरकार और शिक्षा विभाग की उदासीनता इतनी बढ़ जाए कि संसाधनों के आभाव में 9 साल पहले खोला गया, स्कूल ही बंद होने की कगार पर आ जाए।

यहां के जिले मदनपुर के बच्चे 5 सौ फीट ऊंचे पहाड़ से उतरकर और करीब 3 किलोमीटर की दूरी तय करके पढ़ने के लिए जाते है। ये इलाका जगह अति नक्सल प्रभावित जगहों की गिनती में आती है। यहां करीब 9 साल पहले एक स्कूल खोला गया था। शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की अनदेखी की वजह से स्कूल को आजतक भवन नसीब नहीं हुआ, ये एक झोपड़ी में चल रहा है।

इस स्कूल की स्थापना साल 2007 में हुई थी। स्कूल के  शिक्षक उलट परिस्थितियों के बावजूद इसका संचालन करते रहे। लेकिन अब इसकी स्थिति सोचने को मजबूर करने वाली हो चली है और उसकी वजह से स्कूल में लगातार कम हो रहे पढ़ने वाले बच्चों उपस्थिति है। वही बाद में झोपड़ी में चलने वाला ये स्कूल पचरुखिया से दूर वकीलगंज गांव स्थानांतरित कर दिया गया। उसका नतीजा यह निकला कि यहां छात्रों की संख्या ना के बराबर हो गई।

फिलहाल इस स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए 8 दिसंबर 2016 को विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया है। वही इसे पीतंबरा गांव में चलाने का निर्देश दिया गया है। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य शंकर कुमार के अलावा एक शिक्षक संजय ठाकुर पदस्थापित है। प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए नया नामांकन किये गए है। करीब 60 बच्चो का नामांकन भी हो गया है। पीतंबरा, दुर्गापुर, मनवादोहर, लंगुराही, पचरुखिया व राजातरी आदि गांव के बच्चो ने नामांकन लिया है।

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