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प्रेजेंटेशन में बताएंगे सालभर में क्या बेहतर पढ़ाया बच्चों को

इस साल आउटसोर्सिंग से ज्यादातर स्कूलों में मुख्य विषयों के शिक्षकों की व्यवस्था शिक्षा विभाग ने की थी। खासतौर पर अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे विषयों पर महकमे का ज्यादा फोकस इसलिए था कि इन्हीं विषयों में बच्चों को परेशानी होती है।
इन अध्यापकों ने सालभर में एेसी जो बाते छात्रों को बताई, जिससे उन्हें पढ़ई में फायदा हुआ हो, उसकी प्रेजेंटेशन अब वे जिला स्तर पर देंगे। कलेक्टर अमित कटारिया के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बस्तर जिला के सभी सातों ब्लाक के इन अध्यापकों को अपनी प्रस्तुति 11 मार्च को देने सूचना भेजी है। उस दिन तीन चरण में विषयवार अध्यापकों को यह बताना है कि उन्होंने अपने खुद के स्तर पर क्या बेहतर किया है। यह प्रेजेंटेशन एक तरह से प्रतियोगिता के समान होगी। विभाग के अफसरों का मानना है कि ऐसा पहली बार हो रहा है।

विद्यार्थियों को होगा फायदा : विभिन्न ब्लाकों से जब टीचर यहां आकर अपने पढ़ाने का तरीका और खास तौर पर अपना बेहतर काम बताएंगे तो एक तरह से अध्यापकों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। इससे शिक्षक भी एक-दूसरे की अच्छी बातों को समझ सकेंगे। इसका बड़ा फायदा आगे चल कर विद्यार्थियों को मिलेगा। शिक्षक अपने-अपने स्कूलों में जाकर यहां अनुभव बच्चों के साथ साझा करेंगे।

शिक्षकों को मिलेगा प्रोत्साहन

शिक्षक जब अपना-अपना बेहतर किया हुआ काम बताएंगे तो दूसरे अध्यापकों को कुछ नई चीजें समझने मिलेंगी। वहीं इस पहल से शिक्षक प्रोत्साहित भी होंगे। इसी का फायदा छात्रों को मिलना है। कलेक्टर के निर्देश पर 11 मार्च को जिला मुख्यालय में अंग्रेजी, विज्ञान, गणित विषय के अध्यापक अपने बेहतर काम का दूसरे शिक्षकों के साथ शेयर करेंगे। राजेंद्र झा, जिला शिक्षा अधिकारी

दिक्कतें भी चलेंगी पता अफसरों को

इस पहल का मकसद यह है कि इन महत्वपूर्ण विषयों पर अध्यापकों को एक दूसरे का दृष्टिकोण भी समझ आएगा। वहीं पढ़ाते समय उन्हें कहां दिक्कत आती है यह भी सामने आएगा। हाई स्कूल स्तर पर पढ़ाने में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि 8वीं तक बच्चों को ग्रेड सिस्टम से पास कर दिया जाता है। इसके बाद की पढ़ाई समझना बच्चों के लिए आसान नहीं रहता। यही एक वजह भी रहती है कि 10वीं बोर्ड का रिजल्ट कमजोर रहता है। 

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