मानव संसाधन विकास मंत्रालय(एमएचआरडी) देश के 44 सेंट्रल यूनिवर्सिटी की
शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सर्वे कर रहा है। सर्वे की प्राथमिक रिपोर्ट
में सामने आया है कि गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी की शिक्षा गुणवत्ता
का स्तर गिरा है। बिलासपुर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसरों के 215
पद खाली हैं। एमएचआरडी ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी को खाली पदों में सही तरीके
से भर्ती करने के लिए 6 महीने का समय दिया है।
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 32 विभाग संचालित हैं। लगभग 7
हजार छात्र अध्ययनरत हैं। यूनिवर्सिटी में अधिकांश विभागों में नियमित
प्राध्यापक ही नहीं हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षा गुणवत्ता व
शिक्षकों की स्थिति के सर्वे के लिए 4 सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें पूर्व
यूजीसी चेयरमैन डॉ. डीएस चौहान, प्रोफेसर सुषमा यादव, पंजाब सेंट्रल
यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. जयरूप सिंह व बीयू के कुलपति प्रो. जीडी
शर्मा शामिल हैं। इस सर्वे के पहले चरण में सदस्यों ने देश की 44
यूनिवर्सिटी से विभाग और शिक्षकों की संख्या की जानकारी ली है। इससे पहले
सभी यूनिवर्सिटी से पूछा गया था कि पहले के अलावा और कितने शिक्षकों की
आवश्यकता है। वहीं कौन से विभाग और खोलने की जरूरत हैं। इसमें गुरु घासीदास
सीयू को छोड़कर अन्य सेंट्रल यूनिवर्सिटियों ने 800 शिक्षकों के पद की मांग
की। गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बारे में कमेटी को पता चला कि
यहां पूर्व से स्वीकृत 215 पद अब तक नहीं भरे जा सके हैं। कई विभाग ऐसे
हैं, जहां एक भी नियमित प्राध्यापक नहीं है। कमेटी के सदस्यों के अनुसार
शिक्षकों की कमी के कारण गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी की शिक्षा
गुणवत्ता खराब हुई है।
सर्वे कमेटी में बिलासपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति शामिल
प्रभारी अधिकारियों के भरोसे सीयू
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक सहित अन्य विभाग
प्रभारी अधिकारी के भरोसे है। हद तो ये है कि कुलसचिव पद पर भी प्रभारी
बैठे हैं। पूर्व के प्रभारी कुलसचिव को सीबीआई जांच की वजह से हटाया गया है
लेकिन उनकी जगह पर जिसे जिम्मेदारी दी गई है, वे भी प्रभारी हैं। इसके
अलावा परीक्षा नियंत्रक, वृत्ताधिकारी, सुरक्षा अधिकारी, संपदा अधिकारी भी
प्रभार में चल रहे हैं। यूनिवर्सिटी में इंटर्नल ऑडिट ऑॅफिसर व इंजीनियर भी
नहीं हैं।
यूजीसी के नए निर्देश के कारण यूनिवर्सिटी में पद रिक्त हैं
यह
एक सही जानकारी नहीं है। रोस्टर सिस्टम के संबंध में यूजीसी के नए
निर्देशों के कारण पद रिक्त हैं। हम इसे बदलने की प्रक्रिया में हैं और
जल्द ही पोस्टों को नए रोस्टर के अनुसार विज्ञापित किया जाएगा। एमएचआरडी ने
कभी नहीं कहा है कि जीजीवी में शिक्षा की गुणवत्ता खराब है। हमारे छात्र
बड़ी संख्या में जैसे जेआरएफ, नेट और गेट और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं और सभी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे
हैं । यदि आप चाहें, तो आप मीडिया प्रभारी से प्रामाणिक डेटा प्राप्त कर
सकते हैं। प्रो. अंजिला गुप्ता, कुलपति, गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी
रामप्रताप सिंह | बिलासपुर
मानव संसाधन विकास मंत्रालय(एमएचआरडी) देश के 44 सेंट्रल यूनिवर्सिटी
की शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सर्वे कर रहा है। सर्वे की प्राथमिक रिपोर्ट
में सामने आया है कि गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी की शिक्षा गुणवत्ता
का स्तर गिरा है। बिलासपुर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसरों के 215
पद खाली हैं। एमएचआरडी ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी को खाली पदों में सही तरीके
से भर्ती करने के लिए 6 महीने का समय दिया है।
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 32 विभाग संचालित हैं। लगभग 7
हजार छात्र अध्ययनरत हैं। यूनिवर्सिटी में अधिकांश विभागों में नियमित
प्राध्यापक ही नहीं हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षा गुणवत्ता व
शिक्षकों की स्थिति के सर्वे के लिए 4 सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें पूर्व
यूजीसी चेयरमैन डॉ. डीएस चौहान, प्रोफेसर सुषमा यादव, पंजाब सेंट्रल
यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. जयरूप सिंह व बीयू के कुलपति प्रो. जीडी
शर्मा शामिल हैं। इस सर्वे के पहले चरण में सदस्यों ने देश की 44
यूनिवर्सिटी से विभाग और शिक्षकों की संख्या की जानकारी ली है। इससे पहले
सभी यूनिवर्सिटी से पूछा गया था कि पहले के अलावा और कितने शिक्षकों की
आवश्यकता है। वहीं कौन से विभाग और खोलने की जरूरत हैं। इसमें गुरु घासीदास
सीयू को छोड़कर अन्य सेंट्रल यूनिवर्सिटियों ने 800 शिक्षकों के पद की मांग
की। गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बारे में कमेटी को पता चला कि
यहां पूर्व से स्वीकृत 215 पद अब तक नहीं भरे जा सके हैं। कई विभाग ऐसे
हैं, जहां एक भी नियमित प्राध्यापक नहीं है। कमेटी के सदस्यों के अनुसार
शिक्षकों की कमी के कारण गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी की शिक्षा
गुणवत्ता खराब हुई है।
शिक्षकों की कमी से जर्मन व फ्रेंच डिप्लोमा कोर्स बंद
सीयू में जर्मन व फ्रेंच डिप्लोमा कोर्स चल रहा था। इसमें छात्रों
के आवेदन भी मंगाए गए थे। छात्रों ने फार्म भी भरे, लेकिन पढ़ाई शुरू नहीं
हुई। इसी तरह पॉलिटिकल साइंस में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया।
वहीं लॉ में केवल एक नियमित प्राध्यापक हैं। फॉरेंसिक साइंस विभाग में एक
भी नियमित प्राध्यापक नहीं हैं। एंथ्रोपोलॉजी, इतिहास, हिंदी में भी
प्रोफेसरों की कमी है। इसके अलावा सीयू में छात्रों को मूलभूत सुविधाएं भी
नहीं मिल रही हैं। दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
नहीं मिल रहे हैं काबिल प्रोफेसर
सेंट्रल
यूनिवर्सिटी में खाली पदों पर भर्ती करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन
योग्य और अर्हता के हिसाब से प्रोफेसर नहीं पा मिल रहे हैं। इस वजह से
भर्ती नहीं हो पा रही है। प्रो.प्रतिभा जे.मिश्रा, प्रभारी मीडिया
सेल,सेंट्रल यूनिवर्सिटी
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