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परीक्षा दी फिर भी अनुपस्थित बताकर रोक दिया परिणाम

रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि शिक्षा के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए योजना तो बनाई लेकिन अफसरों ने इसका पलीता निकाल दिया है। आलम यह है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) की ओर से
देशभर में चल रहे डीएलएड कोर्स के परीक्षार्थियों की फजीहत हो रही है। मई 2018 में हुई डीएलएड परीक्षा में 15 हजार से अधिक अप्रशिक्षित शिक्षकों को एनआइओएस ने अनुपस्थित बताकर फेल कर दिया है। अभ्यर्थियों ने परिणाम सुधार के लिए आवेदन किये लेकिन अभी तक दस हजार से अधिक परीक्षार्थियों के परिणाम नहीं सुधारे गए हैं। अभ्यर्थी एनआइओएस के क्षेत्रीय कार्यालयों में चक्कर लगा रहे हैं। आवेदकों के प्रकरणों को सुलझाने में न ही कोई रुचि ले रहा है और न ही उनकी समस्या को सुन रहा है। ऐसे में एनआइओएस की विश्वसनीयता को लेकर भी शिक्षकों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि इसी तरह आगे भी चला तो इसका विरोध भी शुरू हो जाएगा। मामले में क्षेत्रीय अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
सिर्फ दे रहे आश्वासन
एनआइओएस के अफसर सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। यह स्थिति तब है जब डीएलएड की तीसरी बार तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा होने वाली है। अगली 506 की परीक्षाा 20 दिसंबर की दोपहर दो से शाम पांच बजे तक और 507 की परीक्षा 21 दिसंबर को दोपहर दो से शाम पांच बजे तक आयोजित की जाएगी। एनआइओएस ने 506, 507, 508, 509 और 510 विषय के लिए एक हजार रुपये फीस लेकर परीक्षा संबंधित सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। मार्च 2019 तक सभी विषयों की परीक्षा ले ली जाएगी। ऐसे में पहले सेमेस्टर के परिणाम अटकने से शिक्षकों में भारी रोष है। गौरतलब है कि राज्य के 50 हजार से अधिक निजी और सरकारी स्कूलों के अप्रशिक्षित शिक्षक प्रशिक्षण ले रहे हैं।
केंद्र सरकार ने किया है अनिवार्य
देशभर में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण देना अनिवार्य किया गया है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत अप्रशिक्षित शिक्षक, जो सरकारी या निजी स्कूल में कार्यरत हैं उन्हें 31 मार्च 2019 तक डीएलएड कोर्स के अंतर्गत प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए एनआइओएस के माध्यम से एवं एमएचआरडी के स्वयं प्लेटफॉर्म द्वारा 18 महीने के ऑनलाइन कोर्स के तहत प्रशिक्षित होना होगा। जो शिक्षक या शिक्षिका इस अवधि में कोर्स नहीं कर सकेंगे, उन्हें इसके बाद स्कूलों में पढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। 

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