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35 लाख बच्चों के आकलन में पिछड़े अफसर, आनलाइन नहीं हो पाए शिक्षक

 रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल के बच्चों को पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के तहत आनलाइन पढ़ाने और आकलन करने के दावों की हवा निकल गई है। आलम यह है कि प्रदेश में पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने और उनका आकलन करने के लिए एक लाख 35 हजार शिक्षक हैं, लेकिन आनलाइन

आकलन के लिए पंजीयन कराने वाले शिक्षकों की संख्या अभी तक केवल 20 हजार ही है। कुछ बच्चों का आकलन तो शुरू हुआ है, पर आधे से अधिक बच्चे आज भी शिक्षकों से दूर हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को बच्चों के आकलन करने की जिम्मेदारी दी है।

प्रमुख सचिव के आदेश के बाद शिक्षा अफसर सक्रिय नहीं

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के बच्चों का आकलन करने के लिए कहा था। हालांकि कोरोना महामारी के बावजूद भी कुछ शिक्षकों द्वारा बच्चों की पढ़ाई के लिए अनेक नवाचार किए गए। राज्य द्वारा भी लगातार आनलाइन और आफलाइन कक्षाएं संचालित की गईं, ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न हो पाए। इन दावों के बीच अब आकलन के दौरान एक लाख 15 हजार शिक्षकों का अभी तक आनलाइन आकलन करने के लिए पंजीयन नहीं हो पाना एक बार फिर जिलों के शिक्षा अधिकारियों की सक्रियता को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों का आकलन करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया था। इसके बावजूद अभी तक बच्चों का आकलन शुरू ही नहीं हो पाया है।

वर्जन

कोरोना के कारण कुछ शिक्षक आनलाइन पंजीयन नहीं करा पाए हैं। हम इसकी जानकारी ले रहे हैं। - डा. आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा 

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