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रायपुर: दो धड़ों में बंटे शिक्षाकर्मी, एक-दूसरे पर लगाए आरोप

रायपुर। हड़ताल को लेकर शिक्षाकर्मियों दो धड़ों में बंट गए हैं। प्रदेश में 20 नवंबर को अपनी मांगों को लेकर शिक्षाकर्मी हड़ताल करने जा रहे हैं।
लेकिन इस हड़ताल से शिक्षकों के एक बड़े धड़े ने समर्थन वापस ले लिया है। समर्थन वापस लेने वाले संघ का कहना है कि हड़ताल करने वाले संघ उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं रख रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में करीब 30,000 हजार नियमित शिक्षक हैं और करीब 1,80,000 संविदा शिक्षक शिक्षाकर्मी पद पर कार्यरत हैं। सरकार से अपनी मांगों को लेकर वार्ता विफल होने और शिक्षाकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के एलान के बाद शासन प्रशासन और अभिभावकों में बेचैनी बढ़ गयी है।
आम शिक्षक संवर्ग कर्मचारी एकता मंच ने लिया नया मोड़
शिक्षाकर्मियों के हड़ताल पर जाने के मामले में छत्तीसगढ़ आम शिक्षक संवर्ग कर्मचारी एकता मंच ने नया मोड़ ला दिया है। मंच के संचालक कमलेश्वर सिंह ने कहा है कि उनका संगठन इस आंदोलन में हिस्सा नहीं लेगा क्योंकि 8 संगठनों की ओर से बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल में सहायक शिक्षक पंचायत के हकों को गंभीरता से नहीं रखा जा रहा है।
काली पट्टी बांधकर स्कूलों में करेंगे काम
उन्होंने कहा कि हम सभी को नियमित शासकीय शिक्षकों की तरह हक दिलवाने की लड़ाई लड़ना चाहते हैं, जिस पर 27 नवम्बर को हम काली पट्टी बांधकर स्कूलों में काम करेंगे। कमलेश्वर सिंह ने दावा किया है कि उनके मंच के आन्दोलन से अलग होने से हड़ताल बेअसर हो जाएगी और 75 फीसदी स्कूल खुले रहेंगे।
महागठबंधन ने दावे को नकार दिया
इधर हड़ताल करने जा रहे महागठबंधन ने इस दावे को नकार दिया है। शिक्षाकर्मी महागठबंधन के नेता संजय शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सरकार में आने से पहले सरकार बनते ही शिक्षाकर्मियों को समान कार्य समान वेतन की वकालत की थी और अब सरकार मुकर रही है।
कर चुके हैं बड़े आंदोलन
शालेय शिक्षाकर्मी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भानु प्रताप डहरिया ने कहा कि हम शिक्षकों के हक की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं और तब तक लड़ते रहेंगे, जब वो पूरी नहीं हो जाती। हाल ही में हमनें शिक्षाकर्मियों के महीनों से रुके वेतन को जारी करने की मांग की थी। शिक्षकों ने 2004, 2011 और 2012 में नियमितिकरण और सातवें वेतनमान की मांग सहित कई मुद्दों को लेकर बड़े आंदोलन किए थे, तब सरकार ने वेतन बढ़ाने का आश्वासन दिया था लेकिन बढ़ाया नहीं।

20 नवंबर को शिक्षाकर्मियों का महागठबंधन हड़ताल करने जा रहा है वहीं शिक्षाकर्मियों के एक बड़े संगठन ने इस हड़ताल से समर्थन वापस लिया है और दावा किया है कि हड़ताल बेअसर होगी।

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