रायपुर। शिक्षाकर्मियों के वेतन का अध्ययन करने राजस्थान गया अफसरों का चार
सदस्यीय दल लौट आया है। दल ने अपनी रिपोर्ट भी संबंधित विभागों को सौंप दी
है, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इससे शिक्षाकर्मियों में
संशय की स्थिति है। शिक्षाकर्मियों ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की
है।
शिक्षाकर्मियों के वेतन और उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं के मंथन के
लिए पिछले दिनों पंचायत एवं शिक्षा विभाग के दो-दो अफसरों का दल राजस्थान
गया था। वहां शिक्षकों को दी जा रही सहूलियतें और वेतन को लेकर दल ने
अध्ययन किया। अफसरों का कहना है कि चूंकि सबसे पहले राजस्थानी में ही
शिक्षाकर्मी जैसा टीचिंग का पैटर्न शुरू किया गया। इसी वजह से यहां से
अफसरों का दल वहीं भेजा गया, ताकि अभी वहां संचालित किए जा रहे सिस्टम का
परीक्षण किया जा सके। राजस्थान से लौटे दल ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है,
लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय
संघ के प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि राजस्थानी पैटर्न ही यहां
लागू करने की मांग कर दी।
24 को बैठक, बड़ा फैसला ले सकते हैं शिक्षाकर्मी
राजस्थान गई टीम की रिपोर्ट सार्वजनिक न करने से नाराज शिक्षाकर्मियों
की 24 अप्रैल को बैठक होने जा रही है। छत्तीसगढ़ शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय
माेर्चा के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने बताया कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की
गई तो शिक्षाकर्मी बड़ा फैसला ले सकते हैं।
सांसद के हस्तक्षेप के बाद आज होगी शिक्षाकर्मियों और संचालक के बीच चर्चा
शिक्षाकर्मियों के कई मांगों पर कल बात बन सकती है। बता दें कि
शनिवार रात नवीन शिक्षाकर्मी संघ के राजनांदगांव जिला संचालक के छन्नू लाल
साहू के नेतृत्व में सांसद अभिषेक सिंह से शिक्षाकर्मियों के विभिन्न
मुद्दों पर चर्चा की। इस पर सांसद अभिषेक सिंह ने पंचायत विभाग के संचालक
तारन प्रकाश सिन्हा से चर्चा कर उचित समाधान के लिए सोमवार को एक
प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करने के लिये निर्देशित किया है।
राजस्थानी फार्मूला
राजस्थानी में पंचायत स्तर पर शिक्षकों की भर्ती का प्रावधान रखा
गया है। पंचायत के माध्यम से शिक्षा कर्मियों की भर्ती की जाती है। दो साल
उन्हें परीविक्षा अवधि में रखा जाता है। उसके बाद उन्हें नियमित शिक्षकों
के अनुसार वेतन भत्ते का फायदा दिया जाता है। इतना ही नहीं राजस्थानी में
जैसे जैसे शिक्षकों के पद खाली हाेते जाते हैं, उसी आधार पर पंचायत के
माध्यम से भर्ती किए गए शिक्षकों को उनकी जगह पोस्टिंग दी जाती है। वहां
शिक्षाकर्मी स्तर के शिक्षक केवल पहली से आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई कराते
हैं। राजस्थानी में हर 9 साल में शिक्षकों को क्रमोन्नति का लाभ देने का
प्रावधान है।
ताकि वरिष्ठता के अनुसार उन्हें वेतन भत्ते का लाभ मिलता रहे।
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