शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए क्या मापदंड रखा गया स्पष्ट नहीं है। लेकिन
उन शिक्षकों का भी स्थानांतरण कर दिया गया है जिसकी जरूरत ही नहीं थी।
क्योंकि ये शिक्षक पूर्व में जहां पदस्थ थे वहां से बमुश्किल 3 से 5
किलोमीटर दूर के स्कूल में पहुंच गए हैं।
यह विसंगति ही है कि जहां पहले से गांव के स्कूलों में कोई शिक्षक पढ़ाने तैयार नहीं हैं ऐसे स्थानों पर पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों को भी उठाकर शहर व उसके आसपास के स्कूलों में ला दिया गया है। शिक्षा विभाग ने जिन 320 शिक्षकों का स्वेच्छा अथवा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत तबादला किया गया है उनमें से 104 की कोरबा शहर, बालको, दर्री-जमनीपाली, कुसमुंडा, बरबसपुर के स्कूलों में पोस्टिंग की गई है।
इससे समझा जा सकता है कि गांव के स्कूलों की आगे चलकर क्या स्थिति होने वाली है। उल्लेखनीय है कि जिले के हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती कर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्राइमरी व मिडिल स्कूल जहां बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी है उन स्कूलों से स्थानांतरित होकर शहर में आने वालों के कारण पढ़ाई का क्या स्तर होगा शायद विभाग इससे अनजान बना हुआ है।
 
5 किमी से कम दूरी में स्थानांतरण कराने वाले शिक्षक
शिक्षक का नाम पूर्व पदस्थापना नई पदास्थापना
इंदु तिवारी मि.स्कूल रुमगढ़ा मि.स्कूल से.-5 बालको
इंदुलता राठौर प्रा. स्कूल दोंदरो गर्ल्स हा.से.स्कूल बालको
रेणु डड़सेना प्रा.स्कूल बेला प्रा.स्कूल से.-4 बालको
सविता पाण्डेय टांगामार दर्री मि.स्कूल जमनीपाली
अल्पना साहू मि.स्कूल पड़निया मि.स्कूल जेपी कालोनी
मुकेश कुमार भारद्वाज --,,-- मि.स्कूल बालक कोरबा
संदीप प्रताप सिंह मि.स्कूल सुमेधा प्रा.स्कूल सुमेधा
गांव के स्कूलों में जाने से इनकार िकए थे शिक्षक
जिला पंचायत द्वारा ग्रामीण अंचल के स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया पूर्व में शुरू की गई थी। जिसका रोचक पहलू यह रहा कि भर्ती होने के बाद भी कई शिक्षकों ने ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाने जाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं कुछ शिक्षकों ने तो 2-2 माह नौकरी करने के बाद यह कहते हुए रिजाइन दे दिए कि वे बेरोजगार रहना पसंद करेंगे पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रहकर नौकरी नहीं करेंगे। इसके बाद भी स्वेच्छा से तबादला मांगने वाले शिक्षकों को उनकी पसंद के स्कूलों में भेज दिया गया है।
आदर्श गांव छातासरई से ले आए बेलगिरी बस्ती अब छातासरई स्कूल में एक भी शिक्षक ही नहीं
जिले में पहाड़ी कोरवा बस्ती छातासरई है। जिसे आदर्श गांव के रूप में विकसित किया गया है। यहां के प्राइमरी स्कूल में पदस्थ शिक्षक डिगेश्वरी लहरे को प्राइमरी स्कूल बेलगिरी बस्ती ट्रांसफर कर दिया गया है। संभवत: इनके ट्रांसफर से छातासरई स्कूल शिक्षक विहीन हो गया है।
स्वेच्छा से ट्रांसफर जहां कहीं मांगा वहां दे दिया
शिक्षकों ने स्थानांतरण नीति का पूरा फायदा उठाया है। उनके द्वारा जिस किसी भी मनचाहे स्कूल का नाम स्वेच्छा से दिया गया उसमें कोई फेरबदल न करते हुए उन्हें वहां भेज दिया गया। विभाग अगर इनके आवेदनों को गंभीरता से लेता तो संभवत: जिले की यह स्थिति नहीं होती। क्योंकि स्वेच्छा शहर व आसपास के स्कूलों को चुनने वाले शिक्षकों को पूरा पूरा लाभ दिया गया है। चाहे इनके कारण पूर्व का स्कूल खाली ही क्यों न हो जाए। यही कारण है कि पूरे जिले में 320 नामों में से 104 को शहर व नजदीक पदस्थापना मिली है।
यह विसंगति ही है कि जहां पहले से गांव के स्कूलों में कोई शिक्षक पढ़ाने तैयार नहीं हैं ऐसे स्थानों पर पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों को भी उठाकर शहर व उसके आसपास के स्कूलों में ला दिया गया है। शिक्षा विभाग ने जिन 320 शिक्षकों का स्वेच्छा अथवा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत तबादला किया गया है उनमें से 104 की कोरबा शहर, बालको, दर्री-जमनीपाली, कुसमुंडा, बरबसपुर के स्कूलों में पोस्टिंग की गई है।
इससे समझा जा सकता है कि गांव के स्कूलों की आगे चलकर क्या स्थिति होने वाली है। उल्लेखनीय है कि जिले के हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती कर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्राइमरी व मिडिल स्कूल जहां बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी है उन स्कूलों से स्थानांतरित होकर शहर में आने वालों के कारण पढ़ाई का क्या स्तर होगा शायद विभाग इससे अनजान बना हुआ है।
 
5 किमी से कम दूरी में स्थानांतरण कराने वाले शिक्षक
शिक्षक का नाम पूर्व पदस्थापना नई पदास्थापना
इंदु तिवारी मि.स्कूल रुमगढ़ा मि.स्कूल से.-5 बालको
इंदुलता राठौर प्रा. स्कूल दोंदरो गर्ल्स हा.से.स्कूल बालको
रेणु डड़सेना प्रा.स्कूल बेला प्रा.स्कूल से.-4 बालको
सविता पाण्डेय टांगामार दर्री मि.स्कूल जमनीपाली
अल्पना साहू मि.स्कूल पड़निया मि.स्कूल जेपी कालोनी
मुकेश कुमार भारद्वाज --,,-- मि.स्कूल बालक कोरबा
संदीप प्रताप सिंह मि.स्कूल सुमेधा प्रा.स्कूल सुमेधा
गांव के स्कूलों में जाने से इनकार िकए थे शिक्षक
जिला पंचायत द्वारा ग्रामीण अंचल के स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया पूर्व में शुरू की गई थी। जिसका रोचक पहलू यह रहा कि भर्ती होने के बाद भी कई शिक्षकों ने ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाने जाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं कुछ शिक्षकों ने तो 2-2 माह नौकरी करने के बाद यह कहते हुए रिजाइन दे दिए कि वे बेरोजगार रहना पसंद करेंगे पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रहकर नौकरी नहीं करेंगे। इसके बाद भी स्वेच्छा से तबादला मांगने वाले शिक्षकों को उनकी पसंद के स्कूलों में भेज दिया गया है।
आदर्श गांव छातासरई से ले आए बेलगिरी बस्ती अब छातासरई स्कूल में एक भी शिक्षक ही नहीं
जिले में पहाड़ी कोरवा बस्ती छातासरई है। जिसे आदर्श गांव के रूप में विकसित किया गया है। यहां के प्राइमरी स्कूल में पदस्थ शिक्षक डिगेश्वरी लहरे को प्राइमरी स्कूल बेलगिरी बस्ती ट्रांसफर कर दिया गया है। संभवत: इनके ट्रांसफर से छातासरई स्कूल शिक्षक विहीन हो गया है।
स्वेच्छा से ट्रांसफर जहां कहीं मांगा वहां दे दिया
शिक्षकों ने स्थानांतरण नीति का पूरा फायदा उठाया है। उनके द्वारा जिस किसी भी मनचाहे स्कूल का नाम स्वेच्छा से दिया गया उसमें कोई फेरबदल न करते हुए उन्हें वहां भेज दिया गया। विभाग अगर इनके आवेदनों को गंभीरता से लेता तो संभवत: जिले की यह स्थिति नहीं होती। क्योंकि स्वेच्छा शहर व आसपास के स्कूलों को चुनने वाले शिक्षकों को पूरा पूरा लाभ दिया गया है। चाहे इनके कारण पूर्व का स्कूल खाली ही क्यों न हो जाए। यही कारण है कि पूरे जिले में 320 नामों में से 104 को शहर व नजदीक पदस्थापना मिली है।