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बायोमैट्रिक्स के चलते शिक्षकों को 11 साल बाद लौटना ही पड़ा मूल शाला

कांकेर/पखांजूर| संलग्नीकरण का आदेश निरस्त किए जाने के बाद से शिक्षाकर्मियों के पदस्थापना व तबादले को लेकर नए नए मामले सामने आ रहे हैं। कभी ग्रामीणों को भेज आदेश रद्द कराने की कोशिश की जा रही है तो कभी स्वयं शिक्षक जिला कार्यालय पहुंच रहे हैं।
इधर शिक्षकों की उपस्थिति की जांच के लिए स्कूलों में शुरू किए गए बायोमैट्रिक्स ने अटैच शिक्षकों का सालों से चल रहा खेल भी बिगाड़ दिया है। इसके चलते अब शिक्षकों को अपने मूल शाला में लौटना मजबूरी हो गई है। पखांजूर स्थित मिडिल स्कूल प्रधान पाठक खगेन मंडल को 11 साल बाद वापस अपने मूल शाला में लौटना पड़ा।

उक्त शिक्षक को 2007 में एसेबेड़ा में पढाई प्रभावित होने का हवाला देकर अटैच कर प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया था। तब से वे यहीं पर पदस्थ हैं जबकि उनकी मूल शाला में 135 बच्चें है। इन्हें पढ़ाने महज दो शिक्षक ही हैं। एसेबेड़ा स्कूल में शिक्षकों की भरमार है। 9 फरवरी को जिले के सभी अटैच शिक्षकों के आदेश को रद्द करते उन्हें मूल शाला जाने एक तरफा भारमुक्त कर दिया गया। इसके बाद भी प्रभारी प्राचार्य खगेन मंडल अपनी मूल शाला में लौटना नहीं चाह रहे थे। पखांजूर के मिडिल स्कूल का बायोमैट्रिक्स मशीन अपने थंब इंप्रेशन से चालू कर वापस एसेबेड़ा लौट गए थे। मशीन को नियमित चालू रखने इनकी मूल शाला में मौजूदगी जरूरी थी। 26 फरवरी के उन्हें वापस मूल शाला लौटना पड़ा।

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