ग्राम डूमरकोट के प्राथमिक शाला एक शिक्षक के भरोसे चला रहा है। यहां दो
शिक्षकों की पदस्थापना की गई थी, लेकिन 2015 से एक सहायक शिक्षक पंचायत
स्कूल पहुंचा ही नहीं। इसके चलते यह स्कूल एक शिक्षकीय हो गया। ग्रामीणों
ने बताया कि स्कूल में सहायक शिक्षक पंचायत लिलेश्वर महावे की पदस्थापना की
गई थी। वह 2015 से स्कूल नहीं पहुंच रहा है।
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सप्ताह में एक दिन न्याय के बारे में पढ़ाएंगे शिक्षक
दंतेवाड़ा | जिला दंतेवाड़ा में कक्षा नौवीं दसवीं के बच्चों को सप्ताह में
एक दिन न्याय सबके लिए पुस्तक पढ़ाई जाएगी । न्याय सबके लिए पुस्तक जिला
विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला प्रशासन ने तैयार की है।
पिता- मेेरे बच्चे को शिक्षक ने बेदम पीटा शिक्षक- शरारती है तो दो बार डंडे से मारा
भास्कर न्यूज|कांकेर/पखांजूर गोंडाहूर प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले छात्र के परिजनों का आरोप है
शिक्षक ने छात्र को थूक चाटने कहा, मना करने पर बेदम पिटाई कर दी। मामला
सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद गरमाता जा रहा है। भास्कर ने भी इसकी
पड़ताल की, तो शिक्षक ने कहा कि छात्र शरारती है।
हाईस्कूल में लगी बायोमेट्रिक, समय पर शिक्षकों की होने लगी है उपस्थिति
राजिम| सरकारी कार्यालयों के साथ ही अब शिक्षण संस्थाओं में भी बायोमेट्रिक
तकनीक का उपयोग होने लगा है । नगर के शासकीय रामविशाल पांडे बालक हाई
स्कूल में इस वर्ष से बायोमैट्रिक डिवाइस सेट किया गया है।
वेतनमान एक स्टेप कम मिला, शिक्षकों की बैठक में मंत्री बंगला घेरने का फैसला
रायपुर | छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को
पेंशनबाड़ा स्थित प्रांतीय कार्यालय में रखी गई थी।
संविलियन के बाद भी ऐसे शिक्षाकर्मियों पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई, सरकार बना रही लिस्ट
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षाकर्मियों की
संविलियन की मांग को पूरा किया है, जो इस माह के 1 जुलाई से लागू भी हो गया
है। इधर सरकार ऐसे शिक्षकर्मियों की भी कुंडली बना रही है जो फर्जी
दस्तावेजों से शिक्षाकर्मी बने बैठे हुए हैं। इसकी शुरूआत हो गई छत्तीसगढ़
के धमतरी जिले से।
चार साल से किराए पर पढ़ाई और आवास, बिल्डिंग बनी तो मेडिकल कॉलेज खोल दिया
आदिवासी छात्रों के लिए राज्य के स्तर पर कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं,
लेकिन केंद्रीय मद से चलने वाले एकलव्य विद्यालय उपेक्षा के शिकार हो रहे
हैं। प्रदेश में 25 एकलव्य विद्यालय हैं, पिछले कई सालों से चल रहे इन
विद्यालयों को न तो आज तक स्थाई शिक्षक मिले और न ही स्टॉफ।
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