रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई है, जिसने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को गंभीर चुनौती में डाल दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में 25 प्रतिशत से अधिक शिक्षक पद रिक्त हैं। यानी हर चार में से एक पद खाली पड़ा है।
32 हजार से ज्यादा पद खाली
राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार—
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कुल मिलाकर 32,677 शिक्षक पद रिक्त हैं
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इनमें सहायक शिक्षक के करीब 24 हजार पद खाली हैं
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अन्य शिक्षक संवर्ग में भी 8 हजार से अधिक पद रिक्त हैं
यह स्थिति प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के स्कूलों में देखी जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा सीधा असर
शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है—
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कई स्कूलों में एक शिक्षक कई कक्षाओं को संभालने को मजबूर है
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ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में एकल शिक्षक विद्यालय चल रहे हैं
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कुछ स्कूलों में विषय शिक्षक न होने से पाठ्यक्रम अधूरा रह रहा है
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो सीखने के स्तर में गिरावट तय है।
शिक्षक संगठनों की चेतावनी
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि—
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तत्काल बड़ी संख्या में शिक्षक भर्ती शुरू की जाए
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रिक्त पदों को भरने के लिए स्पष्ट भर्ती कैलेंडर जारी हो
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अस्थायी व्यवस्था के बजाय स्थायी समाधान किया जाए
उनका कहना है कि सीमित भर्ती से समस्या का समाधान नहीं होगा।
सरकार की तैयारी
सरकार ने शिक्षकों की कमी को स्वीकार करते हुए कुछ नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हजारों पदों के मुकाबले सीमित भर्ती पर्याप्त नहीं है।
भविष्य की चिंता
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां सरकारी स्कूलों पर बड़ी आबादी निर्भर है, वहां शिक्षकों की कमी शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य दोनों के लिए खतरा बनती जा रही है।