रायपुर। छत्तीसगढ़ में क्रिसमस अवकाश के दौरान शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए बुलाने के आदेश पर उठा विवाद आखिरकार प्रशासन को भारी पड़ गया। शिक्षकों के तीखे विरोध और नाराज़गी के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को अपना आदेश रद्द करना पड़ा। आदेश वापस लिए जाने के बाद शिक्षकों ने राहत की सांस ली है।
अवकाश में प्रशिक्षण को लेकर भड़के शिक्षक
दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में क्रिसमस और शीतकालीन अवकाश के दौरान शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश सामने आते ही शिक्षकों में रोष फैल गया। शिक्षकों का कहना था कि अवकाश उनका वैधानिक अधिकार है और पहले से तय छुट्टियों में प्रशिक्षण थोपना अनुचित है।
सोशल मीडिया और संगठनों ने उठाई आवाज
आदेश जारी होने के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। शिक्षक संगठनों ने भी इसे तानाशाही फैसला बताते हुए विरोध दर्ज कराया। कई जिलों में शिक्षक प्रतिनिधियों ने शिक्षा विभाग से आदेश वापस लेने की मांग की।
विरोध के बाद DEO ने लिया फैसला
बढ़ते दबाव और नाराज़गी को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रशिक्षण संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया कि शिक्षकों की भावनाओं और अवकाश व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब अवकाश या अतिरिक्त कार्यभार को लेकर शिक्षा विभाग विवादों में आया हो। इससे पहले भी छुट्टियों में ड्यूटी, ऑनलाइन उपस्थिति और गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर शिक्षक विरोध दर्ज करा चुके हैं।
शिक्षकों ने जताई संतुष्टि
आदेश रद्द होने के बाद शिक्षक संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में प्रशिक्षण आयोजित करना है तो वह शैक्षणिक कैलेंडर और कार्यदिवसों के भीतर ही किया जाए।
निष्कर्ष
क्रिसमस अवकाश में प्रशिक्षण का आदेश और उसका रद्द होना यह दिखाता है कि बिना संवाद के लिए गए फैसले किस तरह विवाद का कारण बन सकते हैं। शिक्षकों की सहमति और समय-सारिणी का सम्मान किए बिना ऐसे आदेश आगे भी समस्याएं खड़ी कर सकते हैं।