छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग के तहत शिक्षकों की ड्यूटी पर उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। कई शिक्षकों को “कारण बताओ” नोटिस जारी किया गया है क्योंकि वे समय पर ड्यूटी स्थल पर उपस्थित नहीं थे या निरंतर अनुपस्थित दिखाई दिए।
यह नोटिस उनके व्यवहार और जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है और इसके बाद विभाग अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों की पढ़ाई और स्कूल संचालन में व्यवधान किसी भी परिस्थितियों में स्वीकार्य नहीं है, और यदि शिक्षक ड्यूटी का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
🔹 नोटिस क्यों जारी हुआ?
शिक्षकों के खिलाफ नोटिस जारी होने के प्रमुख कारण हैं:
✔ समय पर स्कूल ड्यूटी पर उपस्थित न होना
✔ लगातार गैरहाजिरी के रिकॉर्ड
✔ उपस्थिति रिकॉर्ड में त्रुटियाँ या गड़बड़ी
✔ शिक्षक ड्यूटी नियमों का पालन न करना
ड्यूटी से अनुपस्थिति केवल शिक्षक की व्यक्तिगत अभिलषा नहीं है, बल्कि यह विद्यालय व्यवस्था, छात्रों की पढ़ाई और प्रशासनिक नियमों के विरुद्ध भी है।
🔹 “कारण बताओ” नोटिस का क्या मतलब है?
“कारण बताओ” नोटिस का सीधा अर्थ है कि शिक्षक को अपने अनुपस्थित रहने का औचित्य या स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जा रहा है। इस नोटिस से शिक्षक को आदेश दिया जाता है कि वह:
📌 अपनी अनुपस्थिति के पीछे वास्तविक कारण बताए
📌 यदि कोई वैध कारण है तो प्रमाण प्रस्तुत करे
📌 किसी भी गलती या administrative error को सचेत करे
नोटिस का उद्देश्य यह भी है कि शिक्षक को न्यायसंगत रूप से अपनी बात रखने का मौका मिले।
🔹 ड्यूटी अनुपस्थिति का विभाग पर असर
ड्यूटी से अनुपस्थिति के कारण:
🛑 छात्रों की कक्षाएँ प्रभावित हो सकती हैं
🛑 अन्य शिक्षक पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ सकता है
🛑 स्कूल प्रशासन की योजनाएँ बाधित हो सकती हैं
🛑 परीक्षा, गतिविधि या स्कूल कार्यक्रमों में व्यवधान आ सकता है
इसलिए विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि स्कूलों में हर शिक्षक समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करे।
🔹 विभाग की सख्त नीति
शिक्षा विभाग की नीति स्पष्ट है —
शिक्षक का ड्यूटी पर उपस्थित होना प्राथमिक दायित्व है। यदि कोई शिक्षक ड्यूटी नहीं निभाता है और उसके पास कोई उचित कारण भी नहीं है, तो विभाग को कार्रवाई का अधिकार है। इस प्रकार के मामलों में विभाग:
✔ नोटिस जारी करता है
✔ शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा जाता है
✔ यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है तो
✔ वेतन रोका जा सकता है
✔ अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं
यह नीति शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए लागू की जाती है।
🔹 शिक्षकों को क्या करना चाहिए?
नोटिस प्राप्त शिक्षक को चाहिए कि वह:
🔹 जल्द से जल्द कारण स्पष्ट करें
🔹 यदि कोई वैध कारण है तो प्रमाण दें
🔹 विभागीय नियमों का सम्मान करें
🔹 आगे से उपस्थिति में सुधार करें
इस कदम से शिक्षक को न्यायसंगत अवसर मिलेगा कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके।
🔹 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग द्वारा जारी “कारण बताओ” नोटिस यह दर्शाता है कि अब शिक्षक ड्यूटी की जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग छात्रों की पढ़ाई और विद्यालय संचालन की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। शिक्षक समुदाय को भी नियमों का सम्मान करते हुए अपनी ड्यूटी में निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए।
यह नीति विद्यार्थियों के हित में है और समय के साथ इसे और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।