छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षक समुदाय टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) के नियम को लेकर एक बार फिर लामबंद हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि TET की अनिवार्यता से उनकी सेवा सुरक्षा, तैनाती और प्रमोशन प्रभावित हो रही है, इसलिए वे टीईटी से छूट पाने की मांग कर रहे हैं।
यह विरोध शिक्षा विभाग में ज्वलंत मुद्दा बन चुका है और शिक्षकों का मनोबल भी पूरी तरह प्रभावित हुआ है। शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उनकी आवाज़ को नहीं सुनेगी तो वे और भी बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं।
🔹 टीईटी विरोध के पीछे क्या कारण है?
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के विरोध के पीछे कई वजहें हैं:
✔TET अनिवार्यता के चलते अनुभवी शिक्षकों को समस्या
✔प्रमोशन और सेवा निर्णय पर टीईटी का प्रभाव
✔Seniority के आधार पर Career Growth में बाधा
✔Policy में पारदर्शिता न होना
शिक्षकों का कहना है कि TET को केवल प्रारंभिक नियुक्ति तक ही लागू किया जाना चाहिए, न कि सेवा के हर स्तर पर बाधा के रूप में।
🔹 शिक्षक संगठनों की मांग
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट रूप से अपनी मांग रखी है कि:
📌 TET को केवल नियुक्ति की प्रारंभिक शर्त माना जाए
📌 प्रमोशन और स्थानांतरण में इसे बाध्यता न बनाया जाए
📌 अनुभवी शिक्षकों को बिना TET के भी सेवा लाभ मिले
📌 सरकार TET नीति की समीक्षा करे और सुधार लागू करे
शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया तो वे प्रदर्शन और आंदोलन दोनों तेज करेंगे।
🔹 शिक्षा विभाग का रुख
शिक्षा विभाग ने बताया है कि टीईटी नीति को लेकर हर राज्य की नीतियाँ अलग-अलग होती हैं और शिक्षक योग्यता की जांच के लिए टेस्ट की अनिवार्यता रखी जाती है। हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि शिक्षक समुदाय से संवाद और विचार विमर्श करने के लिए बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।
इसके अलावा विभाग ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो एक समीक्षा समिति भी निर्मित की जा सकती है, जिसमें शिक्षक प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
🔹 TET नीति पर विशेषज्ञों की राय
शिक्षा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि टीईटी का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक योग्यता, प्रशिक्षण और शैक्षणिक क्षमता से परिपूर्ण हों। लेकिन विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि:
✔ केवल TET पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है
✔ अनुभवी शिक्षकों के मूल्य को भी मान्यता दी जानी चाहिए
✔ टीईटी नीति में बदलाव आयु, Seniority और अनुभव के साथ होना चाहिए
इसलिए नीति को Teachers’ Feedback के आधार पर संशोधित करने का सुझाव दिया जा रहा है।
🔹 विवाद का व्यापक प्रभाव
इस विरोध आंदोलन का असर केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नीति और भविष्य की नियुक्तियों पर भी प्रभाव डाल सकता है। यदि TET से छूट दी जाती है या नीति संशोधित होती है, तो यह:
📌 अनुभवी शिक्षकों को राहत देगा
📌 शिक्षा विभाग में मनोबल बढ़ाएगा
📌 नए नियुक्त शिक्षा मानकों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा
🔹 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में टीईटी से छूट की मांग शिक्षक समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण आंदोलन बन चुकी है। यह स्पष्ट संकेत है कि शिक्षक केवल नियम पालन नहीं चाहते, बल्कि नियमों में संतुलन, निष्पक्षता और अनुभवी शिक्षकों के अधिकारों का सम्मान भी चाहते हैं।
शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच संवाद अब और अधिक आवश्यक हो गया है ताकि दोनों पक्ष संतुलित नीति पर सहमत हो सकें और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती से आगे बढ़ाया जा सके।