Chhattisgarh के शिक्षक संघों ने सरकार से आग्रह किया है कि पेंशन लेने के लिए 33 साल सेवा की बजाय सिर्फ 20 साल सेवा को मान्य सेवा माना जाए, जिससे अधिक से अधिक शिक्षकों को संवैधानिक पेंशन का लाभ मिल सके।
🧑🏫 क्या कहा गया?
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छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि वर्तमान बजट में यह प्रावधान होना चाहिए कि
संविलियन से पूर्व दीर्घकालीन सेवा को भी पेंशन निर्धारण के लिए मान्यता मिले। -
इसका आधार यह है कि बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि सेवा की निरंतरता, वेतन का स्रोत और समानता जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए पूर्व की सेवा को भी पेंशन हेतु स्वीकार करना चाहिए।
📌 मुख्य मांग — 20 वर्षों को मान्यता देना
शिक्षक संगठन सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि:
✔ अब तक की तरह 33 वर्षों की अर्हकारी सेवा की शर्त न लगाई जाए, बल्कि
✔ 20 वर्षों की अर्हकारी सेवा के आधार पर 50% पेंशन निर्धारित किया जाए।
👉 इसका उद्देश्य यह है कि बड़े पैमाने पर सेवा देने वाले सहायक शिक्षकों और करियर शिक्षकों को बेहतर पेंशन लाभ मिल सके।
📊 क्या कहा गया हाई कोर्ट ने?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पेंशन एक कल्याणकारी योजना नहीं बल्कि सेवा के बदले स्थगित पारिश्रमिक है, और इसके लिए पुरानी दीर्घकालीन सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इसके तहत सेवा की निरंतरता, कार्य का स्वरूप और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
🧠 क्यों है यह मांग महत्वपूर्ण?
यह मांग विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए अहम है, जिन्होंने लंबे समय तक सेवा दी है, लेकिन पुराने नियम के तहत उन्हें पेंशन उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस बदलाव से पेंशन योग्यता पहले से उपलब्ध लाभों के करीब आ सकती है।
✨ सार में
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मांग: पेंशन के लिए सेवा की अर्हता 33 साल → 20 साल
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कवर: छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की मांग
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कानूनी आधार: हाई कोर्ट की पेंशन संबंधी टिप्पणी
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लाभार्थी: हजारों पूर्व सेवारत शिक्षक जो पेंशन के पात्र हैं।