छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत *अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित लगभग *1600 पदों पर नियुक्ति नहीं होने के विरोध में अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। इस मुद्दे ने राज्य के शिक्षा क्षेत्र में बड़ी हलचल पैदा कर दी है।
📌 अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आरक्षित पदों पर नियुक्ति नहीं की गई, जिससे आदिवासी समुदाय के युवाओं को भारी असंतोष है।
🧑🏫 विरोध की स्थिति और आंदोलन
📍 आमरण अनशन और पत्राचार
✔ अभ्यर्थी 24 सितंबर 2025 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं,
✔ उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी अपनी मांगों के समर्थन में पत्र भेजे हैं।
🌀 आंदोलन अब गंभीर रूप लेने लगा है — कई युवाओं की तबियत बिगड़ी है और कुछ को अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा है।
🔥 प्रदर्शनों में आक्रामक रूप भी देखा गया
हाल के प्रदर्शन में कुछ अभ्यर्थियों ने अंगारों पर चलकर आंदोलन किया, और पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं। प्रदर्शनकारियों में से कुछ को चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया।
कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि वे सरकार की अनदेखी पर आत्मदाह तक करने को तैयार हैं, और चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और भी उग्र होगा।
📌 आंदोलन के पीछे मुख्य कारण
✔ सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत कुल रिक्त पदों में से
🔹 लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं,
✔ लेकिन इन पदों पर नियुक्ति नहीं की गई,
✔ जबकि सूट सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश भी जारी हैं।
📍 समस्या क्यों गंभीर है?
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आदिवासी वर्ग पर आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने पर सामाजिक असंतोष फैल रहा है।
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भर्तियों में देरी से नौकरी पाने वाले युवाओं और परिवारों में निराशा बढ़ी है।
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आंदोलन इस लिए भी तेज है कि आंदोलनकारी सरकारी निर्णयों में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
🧠 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत 1600 अनुसूचित जनजाति पदों पर नियुक्ति नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों का आंदोलन काफी* लंबे समय से चल रहा है। विरोध सिर्फ धरना तक सीमित नहीं है, बल्कि आमरण अनशन, पुलिस संघर्ष और चेतावनी प्रदर्शन तक पहुँच चुका है, जिससे सरकारी स्तर पर इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय की मांग तेज हो गई है।